एसबि साह - काठमांडू। नेपाल के जलविद्युत परियोजना क्षेत्र, विशेष रूप से रसुवा, टिमुरे और त्रिशूली तटीय क्षेत्र में भदौ १० को आई भारी कीचड़ से भरी विनाशकारी बाढ़ ने देश को एक बड़ी त्रासदी में धकेल दिया है। त्रिशूली ३ 'ए' सहित विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की अंधेरी सुरंगों के भीतर सैकड़ों श्रमिक जीवन और मृत्यु के बीच फंसे हुए थे। घटना के ९ दिनों बाद संजय शाह और कबीर महर्जन के सकुशल जीवित बाहर निकलने से बाकी सुरंगों के भीतर भी जीवन की उम्मीद जगी है। हालांकि, इस घटना ने राज्य के आपदा प्रबंधन और समय की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

समय का मूल्य और विदेशी सहायता में देरी

हम घड़ी की सुई में समय को बहते हुए देख तो सकते हैं, लेकिन बीते हुए समय को कभी वापस नहीं ला सकते। आपदा के पहले चार दिनों तक सरकार द्वारा सुरंग की ओर पर्याप्त ध्यान न देना और भारत तथा चीन से आने को तैयार तकनीक-युक्त अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमों को समय पर न ला पाना एक बड़ी कूटनीतिक और प्रशासनिक चूक साबित हुई है। "सुरंग का कीचड़ साफ करने वाली मशीन दुनिया में कहीं नहीं है" जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान और ढिलाई के कारण शुरुआती अमूल्य समय हाथ से निकल गया। यदि आपदा की शुरुआत में ही आधुनिक तकनीक के साथ विदेशी सहायता का इस्तेमाल किया गया होता, तो आज सैकड़ों नागरिकों की जान बचाई जा सकती थी।

जलवायु न्याय और पड़ोसी चीन की गैर-जिम्मेदारी

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) तथा अमेरिका यात्रा की तैयारी कर रहे प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह को विश्व मंच पर नेपाल की इस त्रासदी और जलवायु न्याय के मुद्दे को मजबूती से उठाना आवश्यक है। दुनिया के शीर्ष कार्बन उत्सर्जक पड़ोसी देश चीन की पर्यावरणीय लापरवाही के कारण नेपाल को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। अत्यधिक औद्योगिक प्रदूषण और अव्यवस्थित शहरीकरण के कारण चीन के ओर्डोस कांगबाशी, युमेन और लानझोऊ न्यू एरिया जैसे क्षेत्र आज 'गोस्ट सिटी' (मृत शहर) में बदल चुके हैं। बाढ़ के संकटपूर्ण समय में नेपाल के लिए आवश्यक सीमापार 'हाइड्रोलॉजिकल डेटा' और अग्रिम सूचना तक उपलब्ध न कराने की चीन की असंवेदनशीलता नेपाल को ही 'गोस्ट कंट्री' बनाने का खतरा बढ़ा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे गैर-जिम्मेदार कार्बन उत्सर्जक राष्ट्रों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें जवाबदेही के दायरे में लाना ही होगा।

प्रचार में उलझी सरकारी प्राथमिकता

नागरिकों की जान जोखिम में होने पर बचाव के बजाय प्रचार को प्राथमिकता देने की सरकारी शैली के खिलाफ आम जनता में भारी आक्रोश है। प्रधानमंत्री जी, अमेरिका यात्रा से लौटते समय गृह मंत्री जी के लिए एक अच्छा कैमरा ले आइएगा, ताकि बचाव कार्य की फोटो-वीडियो '4के क्वालिटी' में आ सके! साथ ही एक 'हाई कॉन्फ़िगरेशन' वाला 'गेमिंग लैपटॉप' भी ले आइएगा, जिससे फील्ड से ही वीडियो रेंडर करके तुरंत अपलोड किया जा सके। बचाव कार्य चाहे कितना भी देर से हो, गृह मंत्री का वीडियो तो जनता को समय पर देखने को मिलना ही चाहिए!