बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव नज़दीक आते ही हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में संकेत दिया गया है कि चुनावी माहौल के बीच अल्पसंख्यक बस्तियों पर दबाव और हमलों की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Associated Press और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर हिंदू बस्तियों को निशाना बनाए जाने, मंदिरों को नुकसान पहुँचाने, सामाजिक बहिष्कार और जबरन विस्थापन जैसी घटनाएँ दर्ज की गई हैं। कुछ प्रभावित परिवारों ने बताया कि उन्हें धमकियों के कारण अचानक घर छोड़ना पड़ा। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर्याप्त या समय पर नहीं रही, और कुछ पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में भी कठिनाई हुई।

विश्लेषकों के अनुसार, हिंदू समुदाय देश की कुल आबादी का लगभग आठ प्रतिशत है और वह पहले से संरचनात्मक भेदभाव की चुनौतियों से जूझता रहा है। लेकिन चुनावी अवधि में जोखिम बढ़ने की बात मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने विशेष रूप से रेखांकित की है। अधिकार समूहों ने यह आरोप भी दर्ज किया है कि कुछ ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त तत्वों द्वारा दबाव और हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं।

मानवाधिकार संस्थाओं ने सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और चुनाव प्रक्रिया को भयमुक्त बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अब तक सरकारी प्रतिक्रिया मुख्यतः औपचारिक बयानों तक सीमित बताई गई है।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो इसका असर व्यापक सामाजिक सद्भाव और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। दक्षिण एशिया के अन्य बहुधार्मिक लोकतांत्रिक देशों के लिए भी यह परिदृश्य निकट निगरानी का विषय बना हुआ है।