वरिष्ठ सीमा विशेषज्ञ बुद्धिनारायण श्रेष्ठ ने नेपाल की आगामी सरकार से सीमा विवादों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। मंगलवार को काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने केवल नए नक्शे जारी किए, लेकिन अपनी जमीन वापस लेने में विफल रहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) को अपनी चुनावी प्रतिबद्धताओं के अनुसार भारत के साथ औपचारिक और सशक्त वार्ता शुरू करनी चाहिए।
श्रेष्ठ ने एक नई कूटनीतिक पहल का प्रस्ताव देते हुए कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा जैसे क्षेत्र नेपाल, भारत और चीन के मिलन बिंदु हैं। इसलिए, इन विवादों को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए एक त्रिपक्षीय तंत्र का गठन अनिवार्य है। उनके अनुसार, नेपाल को सबसे पहले पश्चिमी क्षेत्र के लिम्पियाधुरा में आधिकारिक रूप से त्रि-देशीय बिंदु (Tri-junction point) स्थापित करना चाहिए ताकि तीनों देशों की सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण हो सके।
ऐतिहासिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए विशेषज्ञ ने दावा किया कि अमेरिका और ब्रिटेन के संग्रहालयों में मौजूद दस्तावेज साबित करते हैं कि यह भूमि नेपाल की है। उन्होंने कहा कि यदि यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जाता है, तो नेपाल की जीत निश्चित है। हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत के साथ बड़े व्यापारिक संबंधों के कारण चीन और अन्य वैश्विक शक्तियां इस मुद्दे पर नेपाल का अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही हैं।
राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में, श्रेष्ठ ने निर्माणाधीन नए संसद भवन के परिसर में 'ग्रेटर नेपाल' का नक्शा प्रदर्शित करने का सुझाव दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जब भारत अपने संसद भवन में नेपाल के लुंबिनी जैसे क्षेत्रों को दर्शाने वाला नक्शा लगा सकता है, तो नेपाल को भी अपनी ऐतिहासिक सीमाओं को दिखाने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सीमा की रक्षा न करना भविष्य में देश के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है।