नेपाल की नई पीढ़ी के जेन जी युवा नेताओं पर राज्य की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा निगरानी बढ़ाने की खबर सार्वजनिक होने के साथ ही सोशल मीडिया पर बहस और प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। 'नेपाल आज' में प्रकाशित समाचार को लेकर संबंधित युवा नेता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए अपनी-अपनी राय और नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।

इसी क्रम में, जेन जी महिला नेता जैस्मिन ओझा ने फेसबुक कमेंट के जरिए अपनी बात सार्वजनिक की है। उन्होंने लिखा है, "अगर मुझे निगरानी में रखा ही गया है, तो मैं कोई आतंकवादी नहीं हूं, आखिर क्यों और किसलिए निगरानी में रखा गया है? कारण तो बताना चाहिए न! धत!!! और एक बात, मैं नेपाली नागरिक हूं और नेपाली नागरिकता रखती हूं, जिन्हें नहीं पता उनके लिए केवल जानकारी दे रही हूं !" इससे पहले एक अन्य जेन जी नेता माजिद अंसारी ने भी मीडिया की रिपोर्टिंग पर आपत्ति जताते हुए कमेंट किया था। शुरुआत में पत्रकार शब्द को तोड़-मरोड़कर अपमानजनक शब्द 'पत्रुकार' लिखने वाले अंसारी ने बाद में कमेंट एडिट करते हुए लिखा है, "क्या राज्य के निकाय को इस बारे में जानकारी है ? मुझे शक्तिशाली भारत का एजेंट कहने के बजाय कमजोर बांग्लादेश का एजेंट कहने की हिम्मत आपकी कैसे हुई पत्रकार महोदय? इस आरोप को या तो साबित करें या फिर प्रेस काउंसिल में जवाब देने के लिए तैयार रहें । Nepal Aaja !"

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मूल समाचार में कहीं भी नहीं उठाए गए मुद्दों पर युवा नेताओं द्वारा दी जाने वाली ऐसी सफाई ने व्यंग्य को जन्म दिया है, जिसमें कहा जा रहा है कि उनका राजनीतिक आधार थोड़ा सतही दिखने लगा है। विशुद्ध रूप से राजनीतिक शक्ति संतुलन और निगरानी के विषय में लिखे गए समाचार में न तो किसी आतंकवाद का जिक्र था, और न ही किसी की राष्ट्रीयता या नागरिकता पर सवाल उठाया गया था। लेकिन, सोशल मीडिया पर 'चाकू से ज्यादा धारदार बनने और मिलेनियल्स से ज्यादा बुद्धिमान जेन जी' की शैली पेश करते हुए वे खुद ही काल्पनिक मुद्दे खड़े करने में व्यस्त दिखते हैं। इससे पहले समाचार में जिसका जिक्र तक नहीं था, उस 'एजेंट' शब्द पर माजिद अंसारी ने सवाल उठाए थे, वहीं ये जेन जी महिला नेता तो अंसारी से दो कदम आगे बढ़कर सीधे आतंकवाद और राष्ट्रीयता का प्रमाण पत्र पेश करने पहुंच गईं। अगर ये दोनों 'सर्वज्ञ' जेन जी नेता इसी तरह का अद्भुत प्रयास और विद्वता का प्रदर्शन करते रहे, तो भविष्य में उनका 'प्रधानमंत्री' और 'राष्ट्रपति' बनना तय है। पाठकों को भी आने वाले दिनों में इनसे ऐसे ही और दिलचस्प और मनोरंजक स्पष्टीकरणों की उम्मीद है, ताकि गंभीर राजनीति के भीतर भी मनोरंजन की अच्छी खुराक मिलती रहे।

सार्वजनिक क्षेत्र में मौजूद युवा प्रतिनिधियों द्वारा मीडिया रिपोर्टिंग और जनहित के मुद्दों पर दिए जाने वाले ऐसे बयान उनकी राजनीतिक परिपक्वता और आगामी राजनीतिक यात्रा की दिशा का संकेत देते हैं। राज्य की सुरक्षा निगरानी और उस पर युवा नेताओं की इस अनोखी शैली की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेती है, यह कौतूहल का विषय बना हुआ है।