बारा के जितपुर सिमरा उपमहानगरपालिका-१ की तीन वर्षीय बालिका गरिमा चौधरी के साथ हुई जघन्य आपराधिक घटना को लेकर नेपाल सरकार और पीड़ित परिवार के बीच तीन सूत्री सहमति बनी है। गृह मंत्रालय में शनिवार शाम आयोजित बैठक के दौरान सरकार और मासूम के माता-पिता के बीच इस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
समझौते के अनुसार, जघन्य अपराधों से जुड़े वर्तमान कानूनों और सजा के प्रावधानों की समीक्षा कर नए कानून के निर्माण हेतु सात दिनों के भीतर सुझाव सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा सात सदस्यीय 'गरिमा न्याय संकल्प समिति' का गठन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार की आकांक्षा के अनुरूप बालिका गरिमा चौधरी की प्रतिमा के निर्माण हेतु बुनियादी ढांचा विकास मंत्रालय स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित कर पहल करेगा। गृह मंत्रालय के सचिवालय के अनुसार, परिवार को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार बालिका का अंतिम संस्कार करने की अनुमति पर भी सहमति हुई है।
इस सहमति पत्र पर नेपाल सरकार की ओर से गृह मंत्री सुधन गुरुङ सहित पांच मंत्रियों और पीड़ित परिवार की ओर से गरिमा के पिता मनोज कुमार चौधरी तथा माता मानमती चौधरी ने हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता पीड़ित परिवार की मांगों को पूरा करने के साथ-साथ घटना में न्यायिक प्रक्रिया को त्वरित गति देने और कानूनी सुधारों को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
