दुनिया भर में स्थित 31 नेपाली दूतावासों में से 21 में राजदूत न होने से नेपाल का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व और विदेश नीति का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दो तिहाई बहुमत वाली सरकार के गठन के पांच महीने बीत जाने के बाद भी दूतावासों में प्रमुखों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

चयन प्रक्रिया में गतिरोध

सरकार ने 13 देशों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर राजदूत चुनने के लिए आवेदन तो आमंत्रित किए थे, लेकिन यह प्रक्रिया अब भी अंतिम निर्णय के इंतजार में अटकी है। इसके अलावा सात अन्य देशों में नियुक्तियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

प्रमुख देशों में पद खाली

नेपाल के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब और कतार जैसे देशों में राजदूत पद रिक्त पड़े हैं। इनमें से 11 मिशन पिछले साल नवंबर से और छह मिशन इस साल अप्रैल से बिना प्रमुख के चल रहे हैं।

दूतावासों का पुनर्गठन

सरकार ने दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क और ब्राजील स्थित दूतावासों तथा चेंगदू और सैन फ्रांसिस्को स्थित महावाणिज्य दूतावासों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा कार्यकाल पूरा कर लौटे विदेश मंत्रालय के छह वरिष्ठ अधिकारी भी नई जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे हैं।

गहराता नेतृत्व संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मिशनों में लंबे समय से राजदूतों की कमी से नेपाल के द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो रहे हैं। 15 देशों के लिए अभी तक नामों की सिफारिश भी न हो पाने के कारण यह संकट और लंबा खींचने के संकेत हैं।