नेपाल की नई पीढ़ी के जेन जी युवा नेता राज्य की कड़ी निगरानी में हैं और उन पर भू-राजनीतिक निकटता का संदर्भ जोड़े जाने की खबर प्रकाशित होने के बाद जेन जी नेता वृत्त में सन्नाटा छा गया है। खबर सामने आते ही युवा नेताओं के रिश्तेदारों और दोस्तों ने भी उनकी सुरक्षा और प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर चिंता जतानी शुरू कर दी है।

इसी बीच, खबर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। 'नेपाल आज' ने अपनी खबर में उल्लेख किया था कि "शांतिनगर इलाके के हॉस्टल में रहने वाले महाजित अंसारी बांग्लादेश और पश्चिमी देशों के करीब माने जाते हैं, जबकि बूढ़ानीलकंठ में रहने वाली रक्षा बम तथा कीर्तिपुर इलाके में रहने वाले रवि किरण हमाल पश्चिमी शक्तियों के करीब माने जाते हैं।"

ध्यान देने योग्य मुख्य बात यह है कि मूल खबर में किसी भी देश के 'एजेंट' या 'जासूस' जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया था, केवल कूटनीतिक या वैचारिक रूप से 'निकट' होने का ही उल्लेख था। लेकिन, युवा नेता महाजित अंसारी ने खुद अपनी सोशल मीडिया प्रतिक्रिया में 'एजेंट' शब्द जोड़ते हुए मीडिया पर कड़ी आपत्ति जताई है।

'नेपाल आज' के फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए बहुआयामी, बौद्धिक और धर्मनिरपेक्ष युवा नेता के रूप में पहचाने जाने वाले अंसारी ने लिखा है, "क्या राज्य के निकाय को इस बारे में जानकारी है? मुझे शक्तिशाली इंडिया का एजेंट कहने के बजाय कमजोर बांग्लादेश का एजेंट कहने की हिम्मत तुम्हारी कैसे हुई पत्रुकार? यह आरोप या तो साबित करें या फिर प्रेस काउंसिल में जवाब देने के लिए तैयार रहें। Nepal Aaja !"

प्रतिवाद करने के क्रम में अंसारी ने 'पत्रकार' शब्द को तोड़-मरोड़कर अपशब्द के रूप में 'पत्रुकार' शब्द का प्रयोग किया है। एक अध्ययनशील और बौद्धिक युवा नेता के रूप में जाने जाने वाले अंसारी द्वारा गुस्से में आकर बिना विवेक का इस्तेमाल किए तुरंत बहकावे में आकर ऐसा निम्नस्तरीय शब्द इस्तेमाल करने पर यह टिप्पणी शुरू हो गई है कि यह उनके व्यक्तित्व और छवि के अनुकूल नहीं है।

अंसारी की उस आक्रोशपूर्ण टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर नागरिकों की ओर से भी काफी उग्र और गुस्से भरी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। अंसारी की टिप्पणी का विरोध करते हुए प्रदीप पोखरेल नाम के एक फेसबुक यूजर ने लिखा है, "Majid Ansari त देश को लागि गदर होस तलाई देश निकाला गरियोस् !"

राज्य की खुफिया एजेंसी की निगरानी, मीडिया की रिपोर्टिंग और उस पर बौद्धिक कहे जाने वाले युवा नेता द्वारा आवेग में दिए गए गैर-जिम्मेदाराना बयान और आम जनता के गुस्से ने सड़कों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक के माहौल को और अधिक उत्तेजित और पेचीदा बना दिया है।

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