नई दिल्ली — भारत और ब्रिटेन ने रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। दोनों देश भारतीय नौसेना के युद्धपोतों में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने और हल्की बहुउद्देशीय मिसाइलों के उत्पादन से संबंधित दो अंतर-सरकारी समझौते करने की तैयारी में हैं।

समझौते के तहत भारतीय नौसेना के लिए बनने वाले चार Landing Platform Dock (LPD) में Integrated Full Electric Propulsion (IFEP) प्रणाली विकसित और स्थापित करने की योजना है। इस तरह की प्रणाली से युद्धपोत की ऊर्जा दक्षता बढ़ने के साथ-साथ अतिरिक्त सेंसर, रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

भारत और ब्रिटेन ने वर्ष २०२४ में ही समुद्री इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम को संयुक्त रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित करने पर सहमति व्यक्त की थी। अब प्रस्तावित अंतर-सरकारी समझौता उस सहयोग को व्यावहारिक चरण में ले जाएगा। भारत में इस तकनीक के परीक्षण के लिए GE Vernova और भारत की Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) ने भूमि-आधारित परीक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना भी आगे बढ़ाई है।

रक्षा सहयोग का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू Lightweight Multirole Missile (LMM) का उत्पादन है। ब्रिटेन की तकनीक और भारतीय औद्योगिक क्षमता के बीच सहयोग करके भारत में मिसाइल उत्पादन का विस्तार करने की तैयारी की जा रही है। इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और स्थानीय निर्माण को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले भी ब्रिटेन भारत के साथ Starstreak एयर डिफेंस सिस्टम और LMM जैसे क्षेत्रों में रक्षा औद्योगिक सहयोग आगे बढ़ा चुका है। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग, अनुसंधान और विकास, संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में सहयोग विस्तार की नीति अपनाई है।

२१ अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित भारत-ब्रिटेन Defence Consultative Group की २५वीं बैठक में दोनों पक्षों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग, अनुसंधान एवं विकास, संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग के विस्तार पर चर्चा की थी।

भारत हाल के वर्षों में अपनी नौसेना क्षमता का विस्तार करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं ब्रिटेन के लिए भारत का विशाल रक्षा बाजार और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और महत्वपूर्ण बनाती है।

भारत और ब्रिटेन के बीच इस बढ़ते सहयोग को हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों और चीन के बढ़ते नौसैनिक प्रभाव की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विकास के रूप में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों ने 'Vision 2035' के तहत दीर्घकालिक रक्षा औद्योगिक सहयोग का खाका आगे बढ़ाया है।

समाचार का मुख्य संदेश: भारत और ब्रिटेन अब केवल रक्षा सामग्री की खरीद-बिक्री तक सीमित न रहकर संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं।