नई दिल्ली — भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'समग्र रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंचाने का लक्ष्य भी घोषित किया है।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हाल के दिनों में व्यापार और आर्थिक संबंध विस्तार ले रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1.3 अरब डॉलर पहुंच गया था। नया लक्ष्य उसकी तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। व्यापार विस्तार के लिए गैर-सीमा शुल्क अवरोधों को हटाने, बाजार पहुंच बढ़ाने तथा निवेश और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के मुद्दे पर दोनों पक्ष सहमत हुए हैं।

वार्ता का एक और महत्वपूर्ण पहलू उज्बेकिस्तान से भारत में दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति के लिए ढांचा तैयार करना है। भारत द्वारा अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच परमाणु ऊर्जा से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण करने की कोशिशों के बीच यह सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, बुनियादी ढांचा, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि, स्वास्थ्य, दवा, शिक्षा, पर्यटन और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक नया समन्वय तंत्र स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है।

डिजिटल क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सहयोग आगे बढ़ाया गया है। भारत की UPI प्रणाली को उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय QR प्रणाली से जोड़ने के संबंध में भारत के NPCI International Payments और उज्बेकिस्तान के National Interbank Processing Centre के बीच व्यावसायिक समझौता हुआ है। इससे भविष्य में भारत से उज्बेकिस्तान जाने वाले यात्रियों और व्यवसायों के लिए डिजिटल भुगतान आसान हो सकता है।

भारत द्वारा मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति का विस्तार किए जाने के बीच उज्बेकिस्तान के साथ संबंधों के उन्नयन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशिया के भौगोलिक केंद्र में स्थित उज्बेकिस्तान के साथ व्यापार, ऊर्जा, खनिज, सुरक्षा और परिवहन संपर्क का विस्तार करना भारत के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है।

दोनों देशों के बीच शिक्षा, संस्कृति और सभ्यतागत संबंधों के विस्तार पर भी सहमति बनी है। उज्बेकिस्तान में स्थित बौद्ध विरासत स्थलों फयाजतेपा और करातेपा के संरक्षण तथा पुरातात्विक अनुसंधान में सहयोग करने की समझ भी बनी है।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को 'समग्र रणनीतिक साझेदारी' तक पहुंचाने के निर्णय से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के संबंध अब पारंपरिक व्यापार और कूटनीति से आगे बढ़कर ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तक विस्तार लेंगे।