प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली नई कैबिनेट ने अपनी पहली ही बैठक में जेनजी आंदोलन की जांच के लिए गठित गौरी बहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक और पूर्व आईजीपी चंद्र कुबेर खापुंग पर कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इन पर 'आपराधिक लापरवाही' का आरोप लगाते हुए 10 साल तक की जेल की सजा की सिफारिश की है।

सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने जानकारी दी कि कैबिनेट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ आयोग की सिफारिशों को तुरंत अमल में लाया जाए। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के मामले में एक विशेष अध्ययन समिति गठित की जाएगी, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे का कदम उठाया जाएगा। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब पुलिस साक्ष्य जुटाकर सरकारी वकील को रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद अदालत में मुकदमा चलाने का अंतिम निर्णय महान्यायवादी कार्यालय के मार्गदर्शन में लिया जाएगा।

कार्रवाई की जद में आने वालों की सूची में पूर्व गृह सचिव गोकर्णमणि दुवाडी, पूर्व एपीएफ प्रमुख राजू अर्याल और राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा के साथ-साथ सेना और पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट में शीतल निवास, बालुवाटार और सिंह दरबार की सुरक्षा में तैनात रहे सैन्य अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की बात कही गई है। साथ ही, भीड़ को भड़काने वाले 'टीओबी ग्रुप' के खिलाफ भी फौजदारी जांच शुरू करने की सिफारिश की गई है, जिससे यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक गंभीर मोड़ ले सकता है।