नेपाली समाज में धोखाधड़ी होने या अखाद्य वस्तु मिलने पर भी 'जाने दो' कहकर चुपचाप सहने और शिकायत न करने का चलन आम है। लेकिन, जब उपभोक्ता जागरूक होते हैं तो उनके अधिकारों की रक्षा कैसे होती है, इसका एक उदाहरण हाल ही में काठमांडू में दशैं की महानवमी के दिन देखने को मिला। गत २० अक्टूबर, २०२६ को घर में किसी के न होने और लंबी यात्रा की भारी थकान के बीच बूढानीलकंठ निवासी डेल्टा (नाम बदला हुआ) हवाई अड्डे से पठाओ गाड़ी बुक करके घर पहुंचे थे। थकान से चूर उन्होंने शाम को पठाओ फूड के माध्यम से ऑर्डर करके बालुवाटार स्थित सुल्तान बिरयानी से चिकन बिरयानी मंगवाई। लेकिन, घर पर पहुंचा खाना पूरी तरह अखाद्य, बासी और बदबूदार था। आमतौर पर मौन रहने वाले आम नेपालियों से अलग तरीका अपनाते हुए डेल्टा ने तुरंत पठाओ फूड के ग्राहक सेवा केंद्र में कड़ी शिकायत दर्ज कराई। थोड़ी देर की बातचीत और स्थिति की पुष्टि के बाद, पठाओ फूड ने अपनी गलती स्वीकार की और उस बदबूदार खाने की पूरी राशि ग्राहक को लौटा दी।

त्योहारों के मौके का फायदा उठाकर ऑनलाइन खाद्य आपूर्तिकर्ताओं और रेस्तरांओं द्वारा उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का खेल भी उतना ही फल-फूल रहा है। विशेष रूप से दशैं-तिहाड़ जैसे त्योहारों के समय भोजन के वास्तविक मूल्य को तीन गुना तक बढ़ाकर दिखाने और उस पर ५० प्रतिशत छूट के आकर्षक विज्ञापन देने की होड़ सी मच जाती है। ऐसी लुभावनी छूटों के पीछे भोजन की न्यूनतम गुणवत्ता भी कायम नहीं रहती, और कई दिनों से फ्रिज में जमा करके रखे गए बासी और अखाद्य पकवान ग्राहकों को भेजने की प्रथा पनपने से सीधे-सादे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है।
उपभोक्ता धोखाधड़ी की एक अन्य घटना अंग्रेजी नए साल २०२६ की पूर्व संध्या यानी न्यू ईयर इव के दिन एक रेस्तरां में हुई। खाना खाने के बाद, अल्फा (नाम बदला हुआ) ने अपने परिवार के सदस्यों को खुश करने की उम्मीद में घर के लिए 'पनीर बटर मसाला' पार्सल ऑर्डर किया। खुशी-खुशी घर पहुंचकर जब पैकेट खोला तो परिवार अचानक हैरान रह गया—ग्रेवी में मसाले और बाकी सब कुछ तो था, लेकिन मुख्य सामग्री पनीर ही गायब थी। संभवतः नए साल की भीड़भाड़ और रसोई की अफरा-तफरी के कारण शेफ या रसोइया ग्रेवी में पनीर डालना ही भूल गया था। ग्राहक द्वारा तुरंत फोन करने पर काउंटर के रिसेप्शन ने तो गलती स्वीकार कर ली, लेकिन रसोई के कर्मचारी अपनी गलती मानने को बिल्कुल तैयार नहीं हुए। उस समय रेस्तरां प्रबंधन ने अगली बार आने पर अच्छे से पनीर बटर मसाला बनाकर देने का वादा तो किया, लेकिन उस समय तुरंत कोई मुआवजा नहीं दिया और केवल अगली बार रेस्तरां जाने पर ही उस मांग के पूरा होने की संभावना बाकी रखी।
काठमांडू के बूढानीलकंठ स्थित प्रसिद्ध 'संगम स्वीट्स' की सेवा और गुणवत्ता में आई गिरावट भी उपभोक्ता अधिकारों के दृष्टिकोण से चिंताजनक प्रतीत होती है। बूढानीलकंठ स्थित यह मिठाई प्रतिष्ठान पुरानी जगह से स्थानांतरित होकर नई जगह पर संचालित हुआ है। पुरानी जगह पर संगम स्वीट्स के नियमित ग्राहक रहे अल्फा ने भुगतान करते समय भोजन की औसत गुणवत्ता के बारे में रिसेप्शन पर प्रतिक्रिया दी थी। यह पूछने पर कि कमलपोखरी की मुख्य शाखा में उत्कृष्ट स्वाद मिलता है, लेकिन बूढानीलकंठ शाखा में ही ऐसी कमी क्यों है, कैशियर ने गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया कि "सारा खाना कमलपोखरी से ही बनकर आता है, हम तो बस गर्म करके देते हैं।" बाद में नई जगह स्थानांतरित होने के बाद अगली बार जाने पर काउंटर पर अंग्रेजी लहजे वाली एक महिला कैशियर बैठी थी। वहां अल्फा ने उपलब्ध पकवानों के बारे में पूछकर मसाला डोसा ऑर्डर किया, लेकिन साथ मौजूद दोस्त ने डोसा की जगह समोसा और चाट बोल दिया। बातचीत में अस्पष्टता के कारण मेज पर मसाला डोसा, चाट और समोसा सब आ गया। तैयार खाना बेकार न जाए इसलिए ग्राहक ने वह खाना स्वीकार तो कर लिया, लेकिन खाने लगे तो डोसा का सांभर और चाट की मटर की सब्जी पूरी तरह बदबूदार और दूषित पाई गई।

भोजन के बदबूदार और अखाद्य होने के बावजूद संगम स्वीट्स ने ग्राहक से उसका पूरा पैसा वसूला। काउंटर के कर्मचारियों ने यह तो स्वीकार किया कि खाना सुबह बनाया गया था इसलिए बासी था, लेकिन इसके बदबूदार हो जाने के तथ्य को जबरन खारिज कर दिया। भारी धनराशि का निवेश करके भौतिक बुनियादी ढांचे का उन्नयन करने और होटल का संचालन भी शुरू करने वाले संगम स्वीट्स की सेवा से ग्राहक बेहद असंतुष्ट और निराश हुए हैं। याद रहे, संगम स्वीट्स के भोजन की गुणवत्ता को लेकर कई साल पहले भी पकवान में तिलचट्टा (कॉकरोच) मिलने की गंभीर शिकायत आई थी, जिससे इसके ब्रांड और प्रबंधन पर बार-बार सवालिया निशान खड़े होते रहे हैं।
नेपाल के खाद्य बाजार में व्यापारियों की ऐसी लापरवाही और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कोई नई बात नहीं है। कुछ दशक पहले काठमांडू के न्यू रोड स्थित प्रसिद्ध 'टिप टॉप' के समोसे के अंदर मरा हुआ चूहा मिलने की घटना ने देशभर में बड़ा बवाल मचाया था। काठमांडू के प्रसिद्ध व्यावसायिक केंद्र में स्थित लोकप्रिय मिठाई दुकान में ही ऐसी अखाद्य और भयानक मिलावट मिलने के बाद उपभोक्ता अधिकारों और खाद्य सुरक्षा पर देशव्यापी बहस छिड़ गई थी। वह घटना इतनी चर्चित और ध्यान खींचने वाली बनी थी कि वरिष्ठ हास्य कलाकार दीपक राज गिरी के लोकप्रिय हास्य टेलीफिल्म 'तीतो सत्य' में भी समोसे के अंदर चूहा मिलने के प्रसंग को लेकर व्यंग्यात्मक शैली में एक विशेष दृश्य प्रसारित किया गया था।