नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के बाद एमाले नेतृत्व ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार देते हुए कहा है कि सरकार पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। उपाध्यक्ष गोकर्ण बिष्ट ने पार्टी कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और ओली की बिना शर्त तत्काल रिहाई की मांग की।

एमाले नेता प्रदीप ज्ञवाली ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस घेराबंदी के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार के इस कदम का कानूनी और राजनीतिक, दोनों ही मोर्चों पर कड़ा जवाब दिया जाएगा। ज्ञवाली के अनुसार, इस घटना ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं।

वहीं, नेता विशाल भट्टराई ने गिरफ्तारी के मुख्य आधार यानी कार्की आयोग की रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के संयोजक स्वयं पूर्वाग्रही थे और रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण घटनाओं को नजरअंदाज किया गया है। भट्टराई ने कहा कि केवल एक विशेष पक्ष को दोषी ठहराने वाली रिपोर्ट को आधार बनाकर की गई यह गिरफ्तारी न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध है।

एमाले ने अब संसदीय और जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है। नेताओं का मानना है कि राज्य की इस प्रतिशोधपूर्ण कार्यप्रणाली से देश में स्थिरता और शांति बहाल होना संभव नहीं है। आने वाले दिनों में एमाले की रणनीति यह तय करेगी कि नेपाल की राजनीति किस दिशा में मुड़ती है।