काठमाडौँ के सत्ता के गलियारों और सड़क की राजनीति के एक बार फिर पेचीदा होने के साथ ही नई पीढ़ी के जेन जी युवा नेता राज्य तंत्र की कड़ी निगरानी में आ गए हैं। सरकार विरोधी गतिविधियों, सम्भावित सड़क आंदोलनों और उनके बढ़ते अंतरराष्ट्रीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने छह प्रमुख युवा नेताओं की सूक्ष्म निगरानी शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को उनकी दैनिक गतिविधियों की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों ने इन युवा नेताओं के व्यक्तिगत बायोमेट्रिक विवरण, नागरिकता, पासपोर्ट और जन्मस्थान सहित सभी दस्तावेज एकत्र कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है।
विशेष निगरानी में शामिल नेताओं में गौशाला, काठमाडौँ की निवासी जस्मिन ओझा हैं, जो पेशे से वकील हैं और काठमाडौँ में उनका अपना घर है। उन्हें अमेरिका और भारत के करीब माना जाता है। इसी तरह, काठमाडौँ के कोटेश्वर में अपना घर रखने वाले और पेशे से व्यवसायी मिराज ढुङ्गाना के चीन के करीब होने का सुरक्षा विश्लेषण है। शांतिनगर क्षेत्र के हॉस्टल में रहने वाले महाजित अंसारी बांग्लादेश और पश्चिमी देशों के करीब माने जाते हैं, जबकि बुढानीलकण्ठ में रहने वाली रक्षा बम तथा कीर्तिपुर क्षेत्र में रहने वाले रवि किरण हमाल पश्चिमी शक्तियों के करीब माने जाते हैं। इसी प्रकार, भक्तपुर में रहने वाली तनुजा पाण्डे यूरोपीय संघ और पश्चिमी राष्ट्रों के करीब हैं। जस्मिन और मिराज के अलावा अन्य युवा नेताओं का पेशा अभी तक औपचारिक रूप से सामने नहीं आया है।
ये नेता खास तौर पर जेन जी आयु वर्ग के हैं और वे निरंतर वर्तमान सत्ता और राज्य तंत्र पर गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं। उन्हें भविष्य की राजनीति के वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में देखा जाने लगा है, तथा किसी भी बड़े जनआंदोलन का नेतृत्व करने की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय संबंध बना लेने के कारण सरकार ने उन्हें एक सम्भावित राजनीतिक चुनौती या खतरे के रूप में लिया है।
यह आकलन किया गया है कि यदि नेपाली कांग्रेस के नेता गगन थापा सड़क आंदोलन में उतरते हैं, तो ये जेन जी नेता भी उनके साथ आगामी आंदोलन में कूद सकते हैं। बीते आंदोलनों में ऐतिहासिक धरोहरों को जलाने में भूमिका निभाने या धरोहरों के जलने के दौरान गवाह बने रहने के आरोप लगने के बावजूद, वे ऐसे व्यक्तियों में शामिल हैं जिन्हें आज तक राज्य या राजनीति से लाभ का कोई पद नहीं मिला है।
यह डर पैदा हो गया है कि यदि उनकी राजनीतिक सक्रियता और सड़क की गतिविधियां और तेज होती हैं, तो राज्य 'सुरक्षा देने' के बहाने उन्हें किसी भी समय नियंत्रण में ले सकता है। विश्लेषण किया जा रहा है कि जिस तरह पहले पूर्व प्रधान न्यायाधीश को सुरक्षा के नाम पर नियंत्रण में लिया गया था, उसी तरह इन युवा नेताओं को भी किसी भी क्षण गिरफ्तार किया जा सकता है।
इस बीच, राजनीतिक हलकों में एक गंभीर राजनीतिक षड्यंत्र का सिद्धांत भी चर्चा में है। कुछ विश्लेषकों का दावा है कि वर्तमान सरकार का मूल आधार और सड़क पर मौजूद इन विपक्षी जेन जी नेताओं का राजनीतिक उद्गम स्थल या मूल एक ही है। यह आरोप भी लगाया जाता है कि किसी एक ही दृश्य या अदृश्य शक्ति ने सरकार और सड़क दोनों का नेतृत्व करने का ठेका ले रखा है। शक्ति संतुलन के इस खेल में नई पीढ़ी के युवा कैसे आगे बढ़ते हैं और राज्य की निगरानी क्या रूप लेती है, यह विषय आने वाले दिनों में और भी दिलचस्प होता दिख रहा है।