नेपाल की राजनीति में तीखापन उस समय और बढ़ गया जब सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने स्वयं को राष्ट्रहित के मुद्दों पर डटे रहने के कारण निशाने पर बताया।

झापा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओली ने कहा कि छह दशकों के अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने न कभी भ्रष्टाचार किया और न ही किसी प्रकार का कमीशन लिया। उनके अनुसार, देश के विकास और संप्रभुता के पक्ष में खड़े होने की वजह से उन्हें लगातार घेराबंदी और आरोपों का सामना करना पड़ा है।

ओली ने अपने नेतृत्व में विवादित भूभाग वापस लाने की पहल, उत्तरी सीमाओं के रास्ते खोलने तथा दक्षिण में हुलाकी राजमार्ग निर्माण के माध्यम से मधेश क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सशक्त करने जैसे कदमों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि इन पहलों से कुछ आंतरिक तथा बाहरी शक्तियां असहज हुईं।

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राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र साह की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग एक नगरपालिका को सफलतापूर्वक संचालित नहीं कर सके, उन्हें देश की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा सकती। उन्होंने कहा कि नेपाल न तो प्रयोगशाला है और न ही राजनीतिक मजाक का मंच।

ओली ने दावा किया कि यूएमएल के पास स्पष्ट दृष्टि, नीति और कार्यान्वयन क्षमता है, जो सुशासन, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार नियंत्रण और आर्थिक प्रगति को गति दे सकती है।

देश की संप्रभुता, भौगोलिक अखंडता और स्वतंत्रता की रक्षा का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल की “हर इंच जमीन” की सुरक्षा की जाएगी।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने मतदाताओं से भ्रमित न होने और चल रहे विकास अभियानों को निरंतरता देने की अपील की, यह संकेत देते हुए कि आने वाला राजनीतिक चरण नेतृत्व की विश्वसनीयता की परीक्षा होगा।