काठमांडू — नेपाल के पूर्व राजदूत, प्रखर मानवाधिकार कार्यकर्ता और संविधानवाद के मुखर समर्थक विजयकांत कर्ण ने धार्मिक सहिष्णुता, सद्भाव और समावेशी सोच के पक्ष में अपने सशक्त विचार व्यक्त किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी पहचान बना चुकीं, अत्यधिक लोकप्रिय और चर्चित 'जेन-जी' (GenZ) नेता जैस्मीन ओझा ने हाल ही में पशुपतिनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सोशल मीडिया पर एक विचार साझा किया था। नेता ओझा ने अपने फेसबुक स्टेटस में लिखा था:
"किंतु-परंतु कुछ नहीं, आदिकाल से चली आ रही सनातनी आस्था और परंपरा पर हमला करने के अंदाज में गैर-हिंदुओं का हमारे आराध्य देव भगवान श्री पशुपतिनाथ के पवित्र मंदिर में प्रवेश करना खेदजनक और निंदनीय है। भगवान के पवित्र स्थल पर इस तरह की हरकतें अक्षम्य हैं। सिर्फ माफी काफी नहीं है, आराध्य देव की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों और पशुपति क्षेत्र विकास कोष के कर्मचारियों से भी तुरंत बयान लिया जाए तथा लापरवाही के आधार पर उन्हें कार्रवाई के दायरे में लाया जाए! भगवान पशुपतिनाथ हम सभी की रक्षा करें।"
उक्त स्टेटस पर सकारात्मक और वैचारिक टिप्पणी करते हुए डेनमार्क के लिए नेपाल के पूर्व राजदूत कर्ण ने यह संदेश दिया है कि पशुपतिनाथ सभी के लिए उदार और समभाव रखने वाले देव हैं। सोशल मीडिया पर उनके बयान का जवाब देते हुए कर्ण ने लिखा:
"अगर पशुपतिनाथजी को कोई परेशानी नहीं है, तो दूसरों को क्यों समस्या है? पशुपतिनाथ ने कब और कहां कहा है कि अन्य धर्मावलंबियों को प्रवेश न दिया जाए?"
लंबे समय से मानवाधिकार, संविधानवाद, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता के पक्ष में लगातार खड़े रहे कर्ण के इस विचार ने नेपाली समाज में मौजूद बहुसांस्कृतिक सुंदरता, आपसी भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता के मर्म को और अधिक उजागर किया है।
विभिन्न पीढ़ियों के विचारों और दृष्टिकोणों के बीच भी आपसी सद्भाव, लोकतांत्रिक बहस और धार्मिक स्वतंत्रता की भावना को बनाए रखा जाना चाहिए, उनका यह दृष्टिकोण नेपाली समाज में सह-अस्तित्व और भाईचारा बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देगा, ऐसा विश्वास व्यक्त किया गया है।