काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) ने सोमवार को बागमती प्रदेश के सांसदों के साथ चर्चा की। प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय, सिंहदरबार में दोपहर आयोजित इस चर्चा में बागमती प्रदेश के विकास, योजना और समसामयिक राजनीतिक विषयों पर बातचीत हुई।

प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद शाह ने विभिन्न प्रदेशों के सांसदों के साथ अलग-अलग चर्चा करने की श्रृंखला आगे बढ़ाई है। इसी क्रम में बागमती प्रदेश के सांसदों को बुलाया गया था, लेकिन राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सभापति एवं सांसद रवि लामिछाने इस बैठक में अनुपस्थित रहे।

क्या संकेत देती है लामिछाने की अनुपस्थिति?

प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण रणनीतिक और परिचयात्मक चर्चा में रवि लामिछाने की अनुपस्थिति को राजनीतिक हलकों में सामान्य रूप से नहीं देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मुख्य रूप से राजनीतिक 'द्वंद्व' (Conflict) और बढ़ती दूरी की ओर संकेत करता है।

लामिछाने की यह अनुपस्थिति निम्नलिखित विषयों को इंगित करती है:

सत्ता संभालने के बाद असंतोष: इसने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह और रवि लामिछाने के बीच सत्ता समीकरण या कार्यशैली को लेकर आंतरिक असंतोष चरम पर हो सकता है।

नीतिगत या पद का टकराव: प्रदेश के सांसदों के साथ समन्वय बैठक में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चेहरे की अनुपस्थिति होना यह दिखाता है कि दोनों नेताओं के बीच नीति या शक्ति के बँटवारे पर बात नहीं बनी है और टकराव की स्थिति पैदा हुई है।

गठबंधन या सहयोग में शीतलता: बागमती प्रदेश केंद्र की राजनीति के लिहाज से भी काफी संवेदनशील माना जाता है। ऐसी महत्वपूर्ण चर्चा का बहिष्कार करना या उपस्थित न होना सरकार के आंतरिक सहयोग में शीतलता आने और आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण में उथल-पुथल की संभावना को बढ़ावा देता है।

प्रधानमंत्री सचिवालय ने लामिछाने की अनुपस्थिति का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक बाजार में इसे बालेन और रवि के बीच शुरू हुए घोषित/अघोषित 'टसल' और राजनीतिक द्वंद्व के स्पष्ट मानक के रूप में देखा जा रहा है।

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