ट्रेकिंग एजेंसिज़ एसोसिएशन ऑफ नेपाल (TAAN) के अध्यक्ष कृष्णप्रसाद आचार्य ने चेतावनी दी है कि पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, प्रभावी वैश्विक प्रचार और बेहतर कनेक्टिविटी के बिना पोखरा का पर्यटन उद्योग गंभीर संकट की ओर बढ़ रहा है।

 

आचार्य के अनुसार, विजिट नेपाल 2020 की घोषणा और हवाईअड्डे के उद्घाटन के बाद सीधी उड़ानों की उम्मीद में होटल, परिवहन और ट्रेकिंग अवसंरचना में भारी निजी निवेश हुआ। लेकिन कोविड-19 के कारण लंबे समय तक गतिविधियां ठप रहीं और उसके बाद भी पर्यटकों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ी।

उन्होंने बताया कि लगभग 40,000 बेड क्षमता के बावजूद होटल ऑक्यूपेंसी कमजोर है। नेपाली नववर्ष जैसे सीमित पीक सीज़न में 90–95% तक पहुंचने के बाद बाकी महीनों में औसत 20–40% पर सिमटी रहती है। घरेलू पर्यटन कमजोर होने पर स्थिति “गंभीर” हो सकती है।

आचार्य ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में पोखरा के लिए आक्रामक प्रचार सामग्री की कमी, ‘नेपाल सुरक्षित गंतव्य है’ संदेश को सुसंगत रूप से स्थापित न कर पाने, और सुरक्षा-विश्वसनीयता-पहुंच को निर्णायक कारक बताया।

ट्रेकिंग में गाइड अनिवार्यता लागू न होना, TIMS प्रणाली में देरी, और बचाव से जुड़ी घटनाओं से गंतव्य छवि को नुकसान होने की बात भी उन्होंने कही।

काठमांडू-पोखरा सड़क यात्रा की लंबी अवधि की नकारात्मक स्मृतियां, यथार्थपरक हवाई किराया और राष्ट्रीय ध्वजवाहक की सीमित अंतरराष्ट्रीय पहुंच—ये सभी बाधाएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि काठमांडू अकेला पर्याप्त नहीं है और पोखरा व गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों का व्यावहारिक संचालन जरूरी है।

उनका निष्कर्ष स्पष्ट है: केवल अवसंरचना से लक्ष्य हासिल नहीं होंगे; उड़ान विस्तार, सुरक्षा व्यवस्था और निरंतर अंतरराष्ट्रीय प्रचार अनिवार्य हैं।