राजनीतिक नेतृत्व की गुणवत्ता पर चर्चा अब इस सवाल पर केंद्रित हो रही है कि नेता सत्ता तक पहुँचते कैसे हैं। राजनीतिक वैज्ञानिक ब्रायन क्लास के अनुसार, किसी भी लोकतंत्र के लिए यह समझना जरूरी है कि सत्ता की तलाश कौन करता है, उसे प्राप्त कौन करता है और सत्ता व्यक्ति के व्यवहार को कैसे बदलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई जुड़े हुए कारण हैं। कुछ के अनुसार सत्ता समय के साथ लोगों को भ्रष्ट बनाती है, जबकि अन्य का कहना है कि सत्ता की ओर आकर्षित होने वाले व्यक्तित्व पहले से ही समस्या का हिस्सा होते हैं। समाज की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जहाँ कई बार लोकप्रियता को क्षमता से अधिक महत्व दिया जाता है।
मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सत्ता मिलने के बाद जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है और दूसरों पर प्रभाव को लेकर संवेदनशीलता घटती है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डाकर केल्टनर इसे “सत्ता का विरोधाभास” बताते हैं।
न्यूरोलॉजिस्ट डेविड ओवेन द्वारा वर्णित “ह्युब्रिस सिंड्रोम” भी इसी संदर्भ में उल्लेखनीय है, जो सत्ता के लंबे उपयोग से जुड़ा हुआ है और पद छोड़ने के बाद अक्सर कम हो जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि समस्या व्यक्ति से अधिक सत्ता की प्रकृति से जुड़ी है।
ब्रायन क्लास सहित कई विशेषज्ञ समाधान के तौर पर नेतृत्व चयन प्रक्रिया में सुधार, नागरिक निगरानी तंत्र, पदों पर सीमित अवधि और निर्णय-प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की वकालत करते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि नागरिक सत्ता के उपयोग पर कितना सवाल उठाते हैं और कितनी जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
स्रोत: globalanticorruptionblog.com
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