चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से वर्णित “आयरनक्लैड मित्रता” अब बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के कारण तनाव में दिखाई दे रही है। उइघुर मुद्दे से जुड़ी असंतुष्टि और आईएसआईएस–खोरासान की सक्रियता ने क्षेत्र में चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को प्रमुख चिंता बना दिया है।

शिनजियांग में उइघुर समुदाय के साथ कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

आईएसआईएस–के ने उइघुर लड़ाकों की भर्ती के प्रयास तेज किए हैं और पाकिस्तान को संचालन क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल किया है। संगठन ने चीन पर उइघुरों के दमन का आरोप लगाते हुए चीनी लक्ष्यों पर हमलों को वैचारिक आधार देने की कोशिश की है।

चीन–पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों, विशेषकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में, 2025 के दौरान कई हमलों की जिम्मेदारी आईएसआईएस–के ने ली है। पेशावर और क्वेटा में इसके नेटवर्क के खुलासे की रिपोर्ट भी सामने आई है।

अफगानिस्तान में भी चीनी लक्ष्यों पर हमले हुए हैं, जिनमें 2022 में काबुल के एक होटल पर हमला और 2025 में एक चीनी व्यवसायी की हत्या शामिल है।

बलूच लिबरेशन आर्मी वर्षों से चीनी परियोजनाओं को निशाना बनाती रही है, किंतु आईएसआईएस–के की सक्रियता ने इन हमलों को एक व्यापक क्षेत्रीय आयाम दे दिया है।

कराची और दासु जलविद्युत परियोजना से जुड़े हमलों के बाद बीजिंग ने इस्लामाबाद से सुरक्षा उपाय सुदृढ़ करने का आग्रह किया है। रिपोर्टों के अनुसार चीन ने अपने सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव दिया, जिसे पाकिस्तान ने संप्रभुता का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया।

7 जनवरी 2026 को बीजिंग में हुई बैठक के बाद पाकिस्तान ने चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक विशेष सुरक्षा इकाई स्थापित करने की घोषणा की।

इस बीच पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने ग्वादर बंदरगाह पर चीनी सैन्य अड्डे की मांग की खबरों का खंडन किया है।

क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच सीपीईसी और द्विपक्षीय संबंधों की दिशा सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती पर निर्भर करती दिखाई देती है।

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