विश्व ट्रेड यूनियन महासंघ (WFTU), जो दुनिया भर के 11 करोड़ से अधिक श्रमिकों की आवाज है, ने नेपाल के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के ट्रेड यूनियन अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है। महासंघ ने उन रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की है जिनमें नए अध्यादेश या कानूनों के माध्यम से इन अधिकारों को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है।
महासंघ के महासचिव पाम्बिस किरिटिस ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों का संगठित होना और सामूहिक सौदेबाजी करना एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने आगाह किया कि इन अधिकारों में किसी भी तरह की कटौती न केवल श्रमिकों की स्वतंत्रता का उल्लंघन होगी, बल्कि इससे स्थापित श्रम संबंधों की नींव भी कमजोर होगी।
WFTU ने विशेष रूप से सिविल सेवकों, शिक्षकों और सार्वजनिक संस्थानों के कर्मचारियों के लिए ट्रेड यूनियन अधिकारों के पूर्ण संरक्षण की मांग की है। संगठन का मानना है कि श्रमिकों को प्रभावित करने वाला कोई भी नीतिगत निर्णय ट्रेड यूनियनों के साथ सार्थक बातचीत और उनकी सहमति के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।
नेपाली श्रमिक वर्ग के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए, महासंघ ने कहा कि वह स्थानीय संबद्ध संगठनों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के संघर्ष में उनके साथ खड़ा है। इस अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप ने नेपाल में कर्मचारी अधिकारों की रक्षा के मुद्दे को वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन अंतरराष्ट्रीय चिंताओं पर क्या रुख अपनाती है। ट्रेड यूनियन अधिकारों की सुरक्षा का यह मुद्दा भविष्य में नेपाल के सार्वजनिक प्रशासन और श्रम नीति की दिशा तय करेगा।