2026 में सोने ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में अपनी भूमिका को मज़बूत किया है। इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमत 5,500 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई, जिससे वैश्विक निवेशकों का ध्यान इस धातु की ओर गया है।
विश्लेषकों के अनुसार भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक विवादों ने बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों से हटकर सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। विश्व बैंक के अनुसार, अनिश्चितता बढ़ने पर सोने की कीमतों में मजबूती देखी जाती है।
सरकारें भी इस रुझान में अहम भूमिका निभा रही हैं। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट बताती है कि चीन और भारत जैसे देशों के केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं, ताकि अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविध बनाया जा सके।
मुद्रा बाज़ार की स्थिति ने भी कीमतों को सहारा दिया है। रायटर्स के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर के कमजोर होने से अन्य मुद्राओं में लेनदेन करने वालों के लिए सोना सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने से पारंपरिक बचत साधनों का आकर्षण कम हुआ है। ऐसे में सोना मूल्य संरक्षण के साधन के रूप में अधिक आकर्षक बन गया है।
आगे देखते हुए, गोल्डमैन सैक्स सहित कई बड़े वित्तीय संस्थानों ने अपने अनुमान बढ़ाए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रही, तो 2026 के अंत तक सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
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