भारतीय सिनेमा की भावनात्मक पहचान बन चुके गायक अरिजित सिंह ने यह संकेत दिया है कि वे अब नए प्लेबैक प्रोजेक्ट नहीं लेंगे, जिससे हिंदी फिल्म संगीत के एक दौर का अंत होता दिख रहा है।
मंगलवार को इंस्टाग्राम पर साझा संदेश में सिंह ने अपने सफर को “खूबसूरत यात्रा” बताया। उन्होंने निर्णय का कारण स्पष्ट नहीं किया, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार वे मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे और स्वतंत्र संगीत परियोजनाओं पर ध्यान देंगे।
प्लेबैक गायन बॉलीवुड की कहानी कहने की परंपरा का मूल आधार रहा है। इस ढांचे में सिंह की आवाज़ ने प्रेम, विरह और संवेदनशीलता को मुख्यधारा में दोबारा स्थापित किया।
घोषणा के बाद प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। कई लोगों ने कहा कि उनकी आवाज़ जीवन के हर महत्वपूर्ण क्षण की पृष्ठभूमि बन चुकी है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब सिंह वैश्विक मंचों पर भी सक्रिय हैं। हाल ही में लंदन के वेम्बली एरिना में उनका हाउसफुल शो उनके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को दर्शाता है। बावजूद इसके, वे हमेशा ग्लैमर से दूरी बनाए रखते आए हैं।

पश्चिम बंगाल के जियागंज में जन्मे सिंह को बचपन से ही शास्त्रीय और लोकप्रिय संगीत का प्रशिक्षण मिला। 2005 में एक रियलिटी शो में सीमित पहचान के बाद, उन्होंने स्टूडियो में काम करते हुए अनुभव हासिल किया। 2013 में आशिकी 2 के गीत ‘तुम ही हो’ ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
इसके बाद का दौर असाधारण सफलता का रहा, लेकिन लगातार हर जगह अपनी आवाज़ सुनना उन्हें असहज लगने लगा। यही कारण है कि हाल के वर्षों में वे चयनात्मक होते गए।
भले ही प्लेबैक से दूरी बढ़े, अरिजित सिंह की आवाज़ भारतीय संगीत की आत्मा में लंबे समय तक बनी रहेगी।
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