ईरान से संबंधित द्वंद्व में चीन खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है। लेकिन, इस प्रयास की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, चीन के रणनीतिक हितों और पक्षपातपूर्ण संबंधों के कारण उसे पूरी तरह से तटस्थ मध्यस्थ मानना कठिन है। विशेष रूप से ईरान के साथ उसके करीबी संबंधों ने विश्वास की समस्या पैदा कर दी है।

इसके साथ ही, संकेत मिले हैं कि अमेरिका और पश्चिमी शक्तियों ने चीन के प्रस्ताव को प्राथमिकता नहीं दी है। इसने विश्व राजनीति में चीन के कूटनीतिक प्रभाव की सीमाओं को भी उजागर किया है।