विशेष संवाददाता, काठमांडू। काठमांडू महानगरपालिका के प्रमुख बालेंद्र शाह (बालेन) की उच्च लोकप्रियता और राष्ट्रीय राजनीति के मजबूत समीकरण के साथ गठित शक्तिशाली बालेन सरकार के प्रभावशाली परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल चीन दौरे के दौरान अपमानित हुए हैं।

हाल ही में चीन दौरे पर रहे मंत्री खनाल और चीनी पक्ष के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता की एक तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद इसने नेपाल के राजनयिक हलकों और सोशल मीडिया पर बड़ा तरंग पैदा कर दिया है। उच्च स्तरीय कही गई उक्त बैठक के स्थल पर चीनी झंडा तो सम्मान के साथ रखा गया है, लेकिन नेपाल का राष्ट्रीय झंडा रहस्यमय तरीके से गायब कर दिया गया है।

किन्हीं भी दो संप्रभु देशों के बीच होने वाली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता या उच्च स्तरीय मुलाकातों में दोनों देशों का राष्ट्रीय झंडा अनिवार्य रूप से रखा जाना स्थापित अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक मर्यादा (प्रोटोकॉल) है। यह दोनों देशों के बीच समान हैसियत और आपसी सम्मान को दर्शाता है। लेकिन, नेपाल के परराष्ट्र मंत्री को ही सामने बैठाकर चीनी धरती पर की गई औपचारिक वार्ता में नेपाल का झंडा न रखना, चीन द्वारा नेपाल और वर्तमान शक्तिशाली सरकार को 'नीचा दिखाने' और राजनयिक अपमान करने के रूप में गंभीरता से देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर राष्ट्रवाद के 'डबल स्टैंडर्ड' पर कड़ा व्यंग्य

इस घटना की तस्वीर सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर चीन के इस कदम का तीखा विरोध हो रहा है। इसके साथ ही, नेपाल के कथित 'राष्ट्रवादी' राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों की चुप्पी पर भी नागरिक स्तर से कड़े सवाल उठने लगे हैं।

पड़ोसी देश भारत के साथ छोटी-मोटी तकनीकी बातों पर असहमति होने पर भी सड़कों पर उतरने और सोशल मीडिया पर उग्र राष्ट्रवाद का नारा लगाने वाले लोग, चीन द्वारा सीधे देश के परराष्ट्र मंत्री की उपस्थिति में ही राष्ट्रीय झंडा गायब करने पर भी रहस्यमय ढंग से मौन बैठे रहने को कई लोगों ने आश्चर्य के रूप में लिया है।

इसी संदर्भ को लेकर सोशल मीडिया यूजर देवेश झा (Devesh Jha) ने फेसबुक पर कड़ा व्यंग्य करते हुए लिखा है:

"अगर इस तरह नेपाल का झंडा भी बिना रखे द्विपक्षीय वार्ता दिल्ली से की गई होती, तो 'धोती....खाते.....दलाल...' जैसे विशेषणों से विभूषित कर दिया जाता... है कि नहीं...😀 कहां खो गए ज्ञवाली, पाल्पाली, दीक्षित.... घनघोर राष्ट्रवादी लोग...."

झा की इस तीखी अभिव्यक्ति ने नेपाली राजनीति और नागरिक समाज में पड़ोसी देशों को देखने के दृष्टिकोण में मौजूद 'डबल स्टैंडर्ड' (दोहरे मापदंड) को पूरी तरह से उजागर कर दिया है, ऐसा विश्लेषण किया गया है। राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय किसी एक भूगोल या पड़ोसी की तरफ ही लक्षित न होकर सभी देशों के साथ समान होना चाहिए, लेकिन चीन की इस राजनयिक त्रुटि या जानबूझकर किए गए इस व्यवहार पर स्थापित राष्ट्रवादी चेहरों का रहस्यमय ढंग से मौन रहना उनके राष्ट्रवाद की बुनियाद पर ही संदेह पैदा करता है।

राजनयिक कमजोरी या नीयत ?

बालेन सरकार का परराष्ट्र मंत्रालय संभाल रहे शिशिर खनाल को देश के एक बौद्धिक, अध्ययनशील और प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जाता है। लेकिन, अपने ही सामने देश का राष्ट्रीय झंडा अनुपस्थित रहने और राजनयिक मर्यादा का खुलेआम उल्लंघन होने पर भी उसी बैठक में लगातार शामिल रहना और चीनी पक्ष के साथ तत्काल प्रतिवाद या असहमति व्यक्त न करना, मंत्री खनाल की व्यक्तिगत और भ्रमण दल की बड़ी राजनयिक कमजोरी के रूप में भी कुछ विश्लेषकों ने टिप्पणी की है।

"शक्तिशाली सरकार" की मजबूत बुनियाद और राष्ट्रीय स्वाभिमान का नारा देने वाली बालेन नेतृत्व की टीम इस गंभीर राजनयिक अपमान के बारे में चीन सरकार से औपचारिक माध्यम से स्पष्टीकरण मांगती है या 'निचोड़े गए नींबू' जैसे राष्ट्रवाद की तरह चुप्पी साधे रहती है, यह तो आने वाले दिनों में कूटनीतिक कदम ही स्पष्ट करेंगे।

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