चीन में उइघुर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ चल रहे दमनकारी अभियान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मानवाधिकार संगठनों की हालिया रिपोर्टों से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि चीन की दमनकारी नीतियां अब उसकी सीमाओं के पार भी पहुंच चुकी हैं। विदेशों में शरण लिए हुए उइघुर नागरिक अब भी चीनी सुरक्षा एजेंसियों की निरंतर निगरानी, धमकियों और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, चीन अपनी इस "ट्रांसनेशनल रिप्रेशन" (सीमा पार दमन) रणनीति के तहत विदेश में रह रहे उइघुरों के चीन स्थित परिवारों को निशाना बना रहा है। परिजनों के माध्यम से संपर्क सीमित करने और उन्हें डराने-धमकाने का उपयोग प्रवासियों को चुप कराने या वापस लौटने के लिए मजबूर करने के लिए किया जा रहा है। चीनी प्रशासन ने हमेशा की तरह इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी नीतियों को आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा कवच बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन मान रही हैं।

ADVERTISEMENT Xtreme - Inside

इस मुद्दे ने चीन की वैश्विक छवि और वहां की मानवाधिकार स्थिति को फिर से विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है। दुनिया भर के मानवाधिकार रक्षक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि किसी भी समुदाय की पहचान और आवाज को दबाने के लिए राज्य की शक्ति का ऐसा दुरुपयोग अस्वीकार्य है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती चिंताएं क्या बीजिंग को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर पाएंगी।