चीन में सरकारी रोजगार आंकड़ों और श्रमिकों की जमीनी स्थिति के बीच का फासला लगातार गहराता जा रहा है। बड़ी संख्या में ऐसे कामगार सामने आ रहे हैं जो कागजों पर तो कार्यरत हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से अपना काम और नियमित आय गंवा चुके हैं।
चीन के प्रमुख राज्य-स्वामित्व वाले उद्यमों की वार्षिक रिपोर्टों से बड़े पैमाने पर कार्यबल में कटौती का संकेत मिलता है। इन कटौतियों के बाद कंपनियों के नामांकनों से बाहर हुए कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे आर्थिक असुरक्षा बढ़ रही है।
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के मानकों के अनुसार, सर्वेक्षण सप्ताह के दौरान भुगतान या लाभ के लिए कम से कम एक घंटे काम करने वाले व्यक्ति को नियोजित माना जाता है। वहीं, बेरोजगार की श्रेणी में आने के लिए पिछले तीन महीनों में नौकरी की सक्रिय खोज और दो हफ्तों के भीतर काम शुरू करने की तत्परता अनिवार्य है।
यद्यपि ये मानदंड अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानकों के अनुरूप हैं, लेकिन ये उन कर्मचारियों की स्थिति को उजागर नहीं करते जिन्हें स्टैंडबाय पर रखा गया है या जिनके कामकाजी घंटों में कटौती कर दी गई है। अनुबंध बने रहने के बावजूद काम से अलग किए गए कर्मचारी भारी वित्तीय नुकसान का सामना कर रहे हैं।
हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 16 से 24 वर्ष के गैर-छात्र युवाओं में बेरोजगारी दर 18.9% दर्ज की गई है। इसके विपरीत, 30 से 59 वर्ष के वयस्कों के लिए यह दर मार्च के 4.3% से घटकर जुलाई और अगस्त में 3.9% पर आ गई। हालांकि, ये आंकड़े उन कामगारों की संख्या को नहीं दर्शाते जो व्यावहारिक रूप से निष्क्रिय बना दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रम बाजार की वास्तविक सेहत को मापने के लिए अनिवार्य कार्यघण्टा कटौती, स्टैंडबाय स्थिति और आय के नुकसान से जुड़ा पारदर्शी डेटा आवश्यक है। इसके बिना, कागजी रोजगार को वास्तविक आर्थिक सुरक्षा मान लेने का जोखिम बना रहेगा।