नेपाल की राजनीति में आधुनिक डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग और नेताओं की छवि धूमिल करने की कोशिशों पर चिंता गहरा गई है। पूर्व प्रधानमंत्री और नेकपा (एमाले) अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार फर्जी तस्वीरों के वायरल होने के बाद यह विवाद खड़ा हुआ है।

एमाले के प्रचार विभाग प्रमुख निरज आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए इस कृत्य का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने एआई के जरिए नेतृत्व का चरित्र हनन करने की इस कोशिश को अनैतिक, अराजक और आपराधिक हरकत करार दिया।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि तकनीक की आड़ में भ्रम फैलाने वाले इस प्रकार के घृणास्पद अभियानों को तुरंत रोका जाना चाहिए। नेतृत्व के खिलाफ दुष्प्रचार करने की मंशा से किए गए इस कार्य को पार्टी ने काफी गंभीरता से लिया है।

विद्युतीय कारोबार कानून के उल्लंघन को लेकर एमाले ने नेपाल पुलिस के साइबर ब्यूरो का ध्यान आकर्षित किया है। पार्टी ने साइबर अपराध में शामिल दोषियों की तत्काल पहचान कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रसार के बीच राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ डिजिटल दुष्प्रचार की यह घटना देश में साइबर सुरक्षा और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े करती है।

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