नेपाली कांग्रेस के भीतर आंतरिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पूर्व सभापति शेरबहादुर देउबा के नेतृत्व वाले गुट ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सर्वोच्च अदालत पार्टी की आधिकारिकता से जुड़े मामले पर अपना फैसला नहीं सुना देती, तब तक नियमित महाधिवेशन का आयोजन नहीं किया जाना चाहिए। यह बयान नेता श्याम कुमार घिमिरे ने मंगलवार को उस समय दिया, जब विशेष महाधिवेशन से बनी वर्तमान समिति ने नया शेड्यूल जारी किया।
पूर्व सांसद घिमिरे ने तर्क दिया कि अदालत के फैसले के बाद ही यह तय होगा कि पार्टी का वास्तविक नेतृत्व किसके पास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत जिसे भी आधिकारिक घोषित करे, उसी के नेतृत्व में पूरी पार्टी को एकजुट होकर महाधिवेशन में जाना चाहिए। उनके अनुसार, वर्तमान स्थिति में महाधिवेशन की घोषणा करना कानूनी और रणनीतिक रूप से सही नहीं है।
अदालत की देरी पर कटाक्ष करते हुए घिमिरे ने कहा कि संवैधानिक पदों और अन्य राजनीतिक विवादों को लंबित रखने से न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वह अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन करे और कांग्रेस की आधिकारिकता के मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला सुनाए ताकि पार्टी के भीतर की अन्योलता समाप्त हो सके।
इसके साथ ही, देउबा पक्ष ने चेतावनी दी है कि पूर्व सभापति की अनदेखी करना पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। घिमिरे ने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण देउबा पक्ष को दरकिनार करना था। अब सबकी नजरें सर्वोच्च अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं।