संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट हासिल करने के भारत के दीर्घकालिक प्रयास को यूरोप से महत्वपूर्ण राजनयिक समर्थन हासिल हुआ है।
हाल ही में चार यूरोपीय देशों द्वारा नई दिल्ली के दावे का समर्थन किए जाने के बाद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चले आ रहे वैश्विक शासन ढांचे में बदलाव की मांग तेज हो गई है।
भारत की विशाल लोकतांत्रिक व्यवस्था, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, तकनीकी और रक्षा क्षमताएं उसे वैश्विक मंच पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करती हैं।
इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत का निरंतर योगदान और ग्लोबल साउथ, जलवायु परिवर्तन तथा खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों पर उसका नेतृत्व उसकी दावेदारी को और मजबूत करता है।
मौजूदा सुरक्षा परिषद का ढांचा आज के बहुध्रुवीय विश्व की वास्तविकताओं तथा एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के उभरते देशों का पूरी तरह प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
नेपाल जैसे दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के लिए भी वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भारत की बढ़ती पहुंच क्षेत्रीय चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने का एक नया अवसर प्रस्तुत करती है।
वैश्विक शक्ति संतुलन में आ रहे इस बदलाव के बीच यूरोप से मिला यह बढ़ता समर्थन यह स्पष्ट संकेत देता है कि नई दिल्ली को वैश्विक निर्णय लेने वाले सर्वोच्च तंत्र से अलग रखना अब संभव नहीं है।