वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने नेपाल को ब्लैकलिस्ट करने की सख्त चेतावनी दी है। FATF की क्षेत्रीय संस्था, एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि नेपाल सरकार वित्तीय अपराधों को रोकने में पर्याप्त सुधार नहीं दिखाती है, तो उसे जल्द ही ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।
4 महीने का समय और कड़ी चेतावनी
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में होने वाली निर्णायक समीक्षा से पहले नेपाल के पास ठोस नतीजे दिखाने के लिए 4 महीने से भी कम समय बचा है। APG के डिप्टी एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डेविड शैनन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने काठमांडू का दौरा किया।
● नाराजगी: इस प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय और नेपाल राष्ट्र बैंक सहित कई विभागों के साथ बैठकें कीं। सूत्रों के अनुसार, APG के अधिकारियों ने नेपाल के ढीले मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी तंत्र पर गहरी असंतुष्टि जताई है।
● पीएम से मिलने की मांग: FATF के अधिकारियों ने पीएम बालेन शाह से मिलने का समय मांगा है, जिन्होंने यह 'कसम' खा रखी है कि वे अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा किसी और से मुलाकात नहीं करेंगे।
नेपाल ब्लैकलिस्ट होने के कगार पर क्यों है?
● FATF ने वित्तीय अपराधों को रोकने में नाकाम रहने के कारण फरवरी 2025 में नेपाल को 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया था।
● नेपाल को 2027 तक 15 विशिष्ट निर्देशों को लागू करने का समय दिया गया था, लेकिन वह रियल एस्टेट, सहकारी समितियों, कैसिनो और सोने-चांदी जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है।
● नवंबर 2025 तक तैयार की जाने वाली 'नेशनल रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट' राजनीतिक अस्थिरता और सुस्ती के कारण अब तक अधूरी है।
ब्लैकलिस्ट होने का असर क्या होगा?
अगर नेपाल को ब्लैकलिस्ट किया जाता है, तो देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी। वर्ल्ड बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे संगठनों से लोन मिलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। देश की साख गिरने से विदेशी निवेश (FDI) पर सीधा असर पड़ेगा और नेपाल उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, ईरान और म्यांमार जैसे देशों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा।
वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने नेपाल को ब्लैकलिस्ट करने की सख्त चेतावनी दी है। FATF की क्षेत्रीय संस्था, एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि नेपाल सरकार वित्तीय अपराधों को रोकने में पर्याप्त सुधार नहीं दिखाती है, तो उसे जल्द ही ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।
4 महीने का समय और कड़ी चेतावनी
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में होने वाली निर्णायक समीक्षा से पहले नेपाल के पास ठोस नतीजे दिखाने के लिए 4 महीने से भी कम समय बचा है। APG के डिप्टी एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी डेविड शैनन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने काठमांडू का दौरा किया।
● नाराजगी: इस प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय और नेपाल राष्ट्र बैंक सहित कई विभागों के साथ बैठकें कीं। सूत्रों के अनुसार, APG के अधिकारियों ने नेपाल के ढीले मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी तंत्र पर गहरी असंतुष्टि जताई है।
● पीएम से मिलने की मांग: FATF के अधिकारियों ने पीएम बालेन शाह से मिलने का समय मांगा है, जिन्होंने यह 'कसम' खा रखी है कि वे अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा किसी और से मुलाकात नहीं करेंगे।
नेपाल ब्लैकलिस्ट होने के कगार पर क्यों है?
● FATF ने वित्तीय अपराधों को रोकने में नाकाम रहने के कारण फरवरी 2025 में नेपाल को 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया था।
● नेपाल को 2027 तक 15 विशिष्ट निर्देशों को लागू करने का समय दिया गया था, लेकिन वह रियल एस्टेट, सहकारी समितियों, कैसिनो और सोने-चांदी जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है।
● नवंबर 2025 तक तैयार की जाने वाली 'नेशनल रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट' राजनीतिक अस्थिरता और सुस्ती के कारण अब तक अधूरी है।
ब्लैकलिस्ट होने का असर क्या होगा?
अगर नेपाल को ब्लैकलिस्ट किया जाता है, तो देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी। वर्ल्ड बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे संगठनों से लोन मिलना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। देश की साख गिरने से विदेशी निवेश (FDI) पर सीधा असर पड़ेगा और नेपाल उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, ईरान और म्यांमार जैसे देशों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा।