नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा द्वारा हाल ही में दिया गया इस्तीफा अब महज एक औपचारिकता बनकर रह जाने वाला है। इस इस्तीफे के खारिज होने की पूरी संभावना है क्योंकि पार्टी की वर्तमान केंद्रीय समिति पूरी तरह से उनके अपने ही वफादार और मनोनीत सदस्यों से भरी हुई है।

इस राजनीतिक घटनाक्रम की जड़ें हाल ही में संपन्न हुए पार्टी के विशेष महाधिवेशन से जुड़ी हैं। उस अधिवेशन के दौरान, नेतृत्व और पदाधिकारियों के चयन के लिए किसी भी तरह की आंतरिक चुनाव प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी। इसके बजाय, थापा ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए सभी पदाधिकारियों को बिना किसी प्रतिस्पर्धा के सीधे नियुक्त कर दिया था।

चूंकि मौजूदा समिति का हर एक सदस्य अध्यक्ष के ही आशीर्वाद से अपने पद पर काबिज है, इसलिए इस बात की कोई गुंजाइश नहीं है कि वे उनके इस्तीफे को मंजूरी देंगे। एक पूरी तरह से अनुकूल और समर्थक कार्यसमिति होने के कारण, उनका यह कदम स्वाभाविक रूप से रोक दिया जाएगा।

यह स्पष्ट है कि अपने ही द्वारा स्थापित वफादारों के इस मजबूत तंत्र के कारण गगन थापा का इस्तीफा अस्वीकृत कर दिया जाएगा। समिति का यह तयशुदा फैसला भविष्य में भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर उनका निर्बाध नियंत्रण सुनिश्चित करेगा।