श्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्क राज राई ने स्पष्ट किया है कि केवल बातों से देश का निर्माण संभव नहीं है, इसके लिए धरातल पर काम करना अनिवार्य है। शुक्रवार को काठमांडू में पार्टी सदस्यता अभियान के दौरान उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व को अब खोखले नारों के बजाय नतीजों पर ध्यान देना चाहिए। राई के अनुसार, जब तक नागरिक स्वयं श्रमदान के लिए आगे नहीं आएंगे, तब तक विकास की गति अधूरी रहेगी।

राई ने एक महत्वाकांक्षी योजना साझा करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य अपनी पार्टी में कम से कम एक करोड़ श्रमदाताओं को जोड़ना है। उनका मानना है कि यदि एक साथ दो करोड़ हाथ काम करना शुरू कर दें, तो देश की तस्वीर बदल सकती है। उनके अनुसार, सामूहिक श्रमदान न केवल शरीर को मजबूत बनाता है और समाज में एकता लाता है, बल्कि देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में भी अग्रसर करता है।

अपने विजन को साबित करने के लिए उन्होंने दार्चुला में श्रमदान के माध्यम से एक पुल निर्माण की घोषणा की है। राई ने तर्क दिया कि जो काम सरकार करने में विफल रहती है, उसे जनता अपनी मेहनत से पूरा कर सकती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी यह 'श्रम संस्कृति' सरकारी तंत्र और विकास की मुख्यधारा को किस तरह प्रभावित करती है।