पेरिस / क्वेटा — पेरिस स्थित 'बलूच वॉयस एसोसिएशन' (BVA) ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जारी मानवाधिकार संकट, राजनीतिक दमन और जबरन गुमशुदगी के मामलों पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। मुनीर मंगल के नेतृत्व वाली इस संस्था ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय आंकड़ों के आधार पर क्षेत्र में जारी राज्य प्रायोजित दमन का ब्यौरा पेश किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 1948 में कलात की रियासत के विलय के बाद से ही बलूचिस्तान में असंतोष की शुरुआत हुई थी। प्राकृतिक गैस, तेल, सोने और तांबे जैसे समृद्ध संसाधनों से संपन्न होने के बावजूद बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा और गरीब प्रांत बना हुआ है। 60 अरब डॉलर की 'चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा' (CPEC) परियोजना और ग्वादर बंदरगाह के विकास से स्थानीय बलूच आबादी और मछुआरों को बेदखल कर बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
प्रांत में मानवीय स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, जहां जबरन गुमशुदगी और फर्जी मुठभेड़ की घटनाएं लगातार हो रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बलूचिस्तान में 2,752 लोग लापता दर्ज हैं, जबकि स्थानीय कार्यकर्ताओं की सूची के अनुसार 2001 से अब तक 18,000 से अधिक लोग लापता किए जा चुके हैं। वर्ष 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही BVA ने 885 जबरन गुमशुदगी और 121 मौतों को दर्ज किया।
नागरिक अधिकार आंदोलनों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। 22 जून 2026 को क्वेटा की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने 'बलूच यकजेहती कमेटी' (BYC) की प्रमुख नेता डॉ. महरंग बलूच और सिब्घातुल्लाह शाह को उम्रकैद की सजा सुनाई। सम्मी दीन बलूच और बेबर्ग जेहरी सहित कई अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी जेलों में बंद रखा गया है या विभिन्न कानूनों के तहत प्रताड़ित किया जा रहा है।
बलूचिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर गंभीर प्रतिबंध लगे हुए हैं। पत्रकारों को धमकियों, हिंसा और साइबर अपराध कानून (PECA) के तहत मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। BVA ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान में जारी सैन्य निगरानी और मानवाधिकार उल्लंघनों पर संज्ञान लेने की अपील की है।