वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन के बदलते माहौल के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को लगातार मजबूत कर रहा है। नई दिल्ली ने रूस के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ भी मजबूत आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी विकसित की है।
यूक्रेन संकट पर भारत के कूटनीतिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति प्रयासों की तारीफ की है। भारत ने शुरू से ही युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति को समस्या के स्थायी समाधान का जरिया बताया है।
भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक में दशकों पुराना सहयोग रहा है। हालांकि, बदलते दौर में भारत ने अमेरिका, फ्रांस, इजराइल और जापान के साथ रक्षा संबंध बढ़ाकर अपने सैन्य स्रोतों का विविधीकरण किया है।
भारत की बढ़ती कूटनीतिक साख के पीछे उसकी मजबूत अर्थव्यवस्था, विशाल घरेलू बाजार और तकनीकी प्रगति मुख्य आधार हैं। इन्हीं शक्तियों के बल पर भारत किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय बहुध्रुवीय दुनिया में एक स्वतंत्र ध्रुव के रूप में उभर रहा है।
भारत के इस बहुपक्षीय प्रभाव का अप्रत्यक्ष लाभ नेपाल जैसे पड़ोसी देशों को भी मिल सकता है। आने वाले वर्षों में भारत-रूस सहयोग का स्वरूप बदलने के बावजूद यह रणनीतिक साझेदारी वैश्विक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।