पारंपरिक खुफिया ढांचे में बड़ा बदलाव

वैश्विक स्तर पर खुफिया जानकारियों को जुटाने के तरीकों में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। सैन्य ठिकानों या सरकारी दफ्तरों को सीधे निशाना बनाने के बजाय विदेशी जासूसी एजेंसियां अब व्यक्तिगत संबंधों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों और आम नागरिक नेटवर्क का सहारा ले रही हैं। अमेरिका में ताइवान के राष्ट्रपति के बेटे की जासूसी करने के आरोप में हुई एक महिला की गिरफ्तारी ने इस बदलती रणनीति को दुनिया के सामने उजागर किया है।

व्यक्तिगत संपर्कों और जॉब पोर्टल्स का उपयोग

अमेरिकी अदालत के दस्तावेजों के अनुसार 34 वर्षीय वानयिंग "हीदर" झांग को 4 अक्टूबर को लॉस एंजिल्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह चीन जाने की तैयारी में थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि झांग ने साल 2025 में सिएटल जाकर ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बेटे और उनके परिवार के वाहनों के नंबर, तस्वीरें और वीडियो एकत्र कर चीनी अधिकारियों को भेजे थे। यह संपर्क किसी नाटकीय भर्ती प्रक्रिया के बजाय एक पुराने सहपाठी के माध्यम से स्थापित हुआ था।

यह मामला किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। जनवरी 2026 में अमेरिकी नौसेना के पूर्व नाविक जिनचाओ वेई को नौसैनिक जानकारी साझा करने के जुर्म में 16 साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा जून 2026 में फाइभ आइज खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी जारी की थी कि चीनी एजेंसियां लिंक्डइन, इंडीड और अपवर्क जैसे पेशेवर जॉब पोर्टल्स का इस्तेमाल कर संवेदनशील जानकारी रखने वाले लोगों से संपर्क साध रही हैं।

शैक्षणिक साझेदारी और प्रवासी समुदाय पर नजर

जासूसी का यह जाल अब शैक्षणिक संस्थानों और विदेशी समुदायों तक फैल चुका है। सितंबर 2026 में ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई5 ने खुलासा किया कि चीनी वित्तीय सहायता से 100 से अधिक ब्रिटिश शोधकर्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। इसके साथ ही अमेरिका और ब्रिटेन में राजनीतिक विरोधियों तथा प्रवासी समुदायों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए स्थानीय एजेंटों का इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आए हैं।

इन बढ़ती वैश्विक कार्यवाहियों से साफ है कि आधुनिक जासूसी अब सिर्फ साइबर हमलों या रक्षा रहस्यों की चोरी तक सीमित नहीं रह गई है। आम जिंदगी में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंसानी संपर्कों का बढ़ता दुरुपयोग अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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