प्राकृतिक आपदाओं और बार-बार होने वाली सड़क रुकावटों के कारण नेपाल में पैदा होने वाले रसोई गैस संकट को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने एक ऐतिहासिक सीमा पार एलपीजी बुनियादी ढांचा परियोजना पर काम तेज कर दिया है। हिंदुस्तान समाचार के अनुसार, भारत के मोतिहारी से नेपाल के सर्लाही तक 131 किलोमीटर लंबी एलपीजी पाइपलाइन बिछाने और सर्लाही में 50,000 मीट्रिक टन क्षमता का विशाल भंडारण केंद्र बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है।
वर्तमान में नेपाल में सरकारी स्तर पर एलपीजी भंडारण क्षमता लगभग नगण्य है, जिसके कारण राजमार्गों के दो से चार दिन बंद रहने पर भी पूरे देश में रसोई गैस की भारी किल्लत पैदा हो जाती है। हाल ही में 26 अगस्त को भोटेकोशी में आई भीषण बाढ़ से हुई तबाही ने वैकल्पिक आपूर्ति और रणनीतिक भंडारण की आवश्यकता को और रेखांकित किया था। सर्लाही का यह नया हब चालू होने पर नेपाल की पूरे एक महीने की गैस आवश्यकता को आसानी से पूरा कर सकेगा।
एनओसी के एलपीजी एवं एविएशन विभाग प्रमुख बिनीत मणि उपाध्याय के अनुसार, यह परियोजना न केवल आपूर्ति को निर्बाध बनाएगी बल्कि देश को भारी आर्थिक राहत भी देगी। वर्तमान में नेपाल अपनी खपत के लिए 500 से 700 भारतीय बुलेट टैंकरों पर निर्भर है, जो बरौनी, दुर्गापुर, मथुरा और पारादीप जैसे दूरदराज के भारतीय रिफाइनरी केंद्रों से 1,300 किलोमीटर तक की यात्रा तय करते हैं। पाइपलाइन के माध्यम से सीधे गैस आपूर्ति होने से नेपाल को केवल परिवहन भाड़े के मद में सालाना लगभग 6 अरब रुपये की भारी बचत होगी।
सर्लाही में एनओसी के स्वामित्व वाली 14 बीघा से अधिक भूमि पर बनने वाला यह डिपो पूरी तरह से स्वचालित और अत्याधुनिक होगा। इस परिसर में तीन मुख्य इकाइयां होंगी—50,000 टन का भंडारण डिपो, प्रतिदिन 25,000 सिलेंडर भरने वाला बॉटलिंग प्लांट और रोजाना कम से कम 100 बुलेट टैंकर लोड करने वाला आधुनिक गंतव्य तंत्र। यह पाइपलाइन मोतिहारी से मौजूदा मोतिहारी-अमलेखगंज मार्ग का अनुसरण करते हुए बारा जिले के पथलैया तक पहुंचेगी और वहां से 62 किलोमीटर पूर्व की ओर सर्लाही तक विस्तारित की जाएगी। नदियों को सुरक्षित रूप से पार करने के लिए 'हॉरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग' (HDD) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
नई दिल्ली में दोनों देशों के उद्योग एवं आपूर्ति मंत्रालयों के बीच 5वीं जॉइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक में बनी सहमति के बाद एनओसी और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की संयुक्त B2B समिति इस पर तेजी से कार्य कर रही है। भूमि की मृदा परीक्षण रिपोर्ट और अक्षांश-देशांतर सर्वेक्षण रिपोर्ट आईओसी को सौंपी जा चुकी है, जिसके आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
अनुमानित 25 से 30 अरब नेपाली रुपये की लागत वाली इस परियोजना के वित्तीय मॉडल और फंडिंग पर फैसला डीपीआर बनने के बाद दोनों देशों के उच्च राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने से देश के 58 निजी बॉटलिंग संयंत्रों और 1.5 करोड़ से अधिक सक्रिय घरेलू सिलेंडरों को निर्बाध आपूर्ति मिलेगी, जबकि आंतरिक परिवहन का जिम्मा नेपाली ट्रांसपोर्टरों के हाथों में आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।