काठमांडू, आषाढ़ 17। ऐसे समय में जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है, अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषकों ने भारत को चीन के साथ दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम एकमात्र प्रमुख लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में चित्रित किया है।

भू-राजनीतिक विश्लेषक एलेक्स हेलबर्ग के अनुसार, भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, विशाल युवा कार्यबल, लोकतांत्रिक शासन प्रणाली, प्रौद्योगिकी में तीव्र प्रगति और रणनीतिक साझेदारी ने आने वाले दशकों में वैश्विक शक्ति के रूप में उसे और अधिक प्रभावशाली बनाने का आधार तैयार किया है।

विश्लेषकों के अनुसार, भारत विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रक्षा उद्योग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। हाल के वर्षों में, दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं, जिसने भारत के रणनीतिक और आर्थिक महत्व को और बढ़ा दिया है।

भारत की हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में सक्रिय भूमिका, अमेरिका, जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों के साथ सहयोग और एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभरती छवि ने भी भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का विस्तार किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दशक में भारत की आर्थिक क्षमता, तकनीकी विकास और कूटनीतिक सक्रियता से वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। इसी वजह से भारत को 21वीं सदी की प्रमुख उभरती वैश्विक शक्तियों में से एक माना जाने लगा है।