आठवें राष्ट्रीय महिला अधिकार दिवस के अवसर पर नेपाल सरकार ने महिलाओं के अधिकारों को मजबूत बनाने की दिशा में हुई प्रगति के साथ-साथ अभी भी मौजूद सामाजिक चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित किया है।

महिला, बालबालिका, लैंगिक तथा यौनिक अल्पसंख्यक और सामाजिक सुरक्षा मंत्री सीता बादी ने देश और विदेश में रह रही नेपाली महिलाओं तथा महिला अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों और संगठनों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिवस महिलाओं के अधिकारों की स्थापना से जुड़ी ऐतिहासिक उपलब्धियों को याद करने का अवसर है।

‘महिला अधिकार का सम्मान: आत्मनिर्भरता और समृद्धि का अभियान’ विषय के साथ मनाए जा रहे इस दिवस के संदर्भ में उन्होंने 2063 साल जेठ 16 गते पारित उस ऐतिहासिक संसदीय प्रस्ताव को याद किया, जिसने महिलाओं के अधिकारों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया था। उस प्रस्ताव में माता या पिता के नाम से नागरिकता प्राप्त करने का अधिकार, राज्य की संरचनाओं में कम से कम एक-तिहाई महिला भागीदारी, भेदभावपूर्ण कानूनों की समाप्ति और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को समाप्त करने जैसे प्रावधान शामिल थे।

मंत्री ने कहा कि संविधान और समावेशी नीतियों के प्रभाव से स्थानीय निकायों, प्रांतीय सभाओं, संघीय संसद और मंत्रिपरिषद में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। समान वंशानुगत अधिकार, सुरक्षित मातृत्व, प्रजनन स्वास्थ्य और समावेशी प्रतिनिधित्व जैसे संवैधानिक अधिकारों ने महिलाओं की स्थिति को मजबूत किया है।

उन्होंने बताया कि मातृ मृत्यु दर में कमी, महिला साक्षरता में वृद्धि और महिला उद्यमिता के विकास जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। साथ ही, सरकारी संस्थानों और निर्वाचित निकायों में महिलाओं की उपस्थिति भी बढ़ी है।

हालाँकि, बाल विवाह, लैंगिक हिंसा, घरेलू हिंसा और पारंपरिक हानिकारक प्रथाओं जैसी समस्याएँ अब भी महिलाओं के सशक्तीकरण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में बाधा बनी हुई हैं।

सीता बादी ने कहा कि महिलाओं के जीवन में वास्तविक और व्यापक सुधार के बिना समृद्ध राष्ट्र का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने तीनों स्तर की सरकारों से समन्वित नीति, योजना और कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।