देश की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में लगातार उजागर हो रही धांधली और पेपर लीक घटनाओं से उपजे जनआक्रोश के बीच केंद्र सरकार और आंदोलनकारी युवाओं के बीच शुक्रवार को सीधी बातचीत होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं और उच्च माध्यमिक स्तर के ऑनलाइन मूल्यांकन में गड़बड़ियों के कारण देशव्यापी नाराजगी देखने को मिल रही है। इस असंतोष को दिशा देते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर इस देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व कर रही है।

सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बैठक के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों के समक्ष छात्रों और नागरिकों की मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हफ्तों से सड़कों पर डटे युवाओं की आवाज को शासन गंभीरता से सुनेगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट द्वारा पेपर लीक रोधी कड़े कानून पर काम करने की बात कही है, जिसे जल्द ही संसद में पेश कर पारित कराया जाएगा।

इसी बीच, आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना अनशन गुरुवार देर रात समाप्त कर दिया। सरकार द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में विस्तृत चर्चा कराने के भरोसे के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने वांगचुक के अनशन की सराहना करते हुए कहा कि उनके तप ने देश के जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। बीते सोमवार को राजधानी नई दिल्ली में आयोजित विशाल रैली में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए थे, जहां स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। वर्ष 2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में आई मोदी सरकार के लिए यह छात्र आंदोलन अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।