काठमांडू — राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के भीतर नई सरकार के गठन और मंत्रियों के चयन को लेकर मचे घमासान और सत्ता संघर्ष को सुलझाने के लिए एक नया 'फॉर्मूला' पेश किया गया है। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन्द्र शाह (बालेन) और पार्टी सभापति रवि लामिछाने के बीच सत्ता साझेदारी को लेकर हो रही गहन बातचीत में 'एक व्यक्ति, एक पद' की नीति लागू करने पर गंभीर चर्चा हुई है।

रास्वपा के भीतर सरकार में जाने के इच्छुक सांसदों और नेताओं की लंबी कतार लगने के बाद, नेतृत्व को मंत्रिमंडल को पूर्णता देने में मुश्किल हो रही थी। इसी असमंजस को दूर करने और सरकार के कामकाज को प्रभावी बनाने के लिए बालेन गुट ने यह नया प्रस्ताव आगे रखा है।

क्या है 'एक व्यक्ति, एक पद' का प्रस्ताव?

इस नीति का मुख्य सार दोहरी जिम्मेदारी को खत्म करना है। यदि रास्वपा का कोई भी पदाधिकारी या केंद्रीय स्तर का नेता मंत्री बनना चाहता है, तो उसे अपनी कार्यकारी जिम्मेदारी या पार्टी पद किसी अन्य व्यक्ति को सौंपना होगा। यानी मंत्री बनने वाले नेता को पार्टी पद से इस्तीफा देना होगा या पद को स्थगित करना होगा।

इससे पहले पुरानी पार्टियों में मंत्री भी खुद बनने और पार्टी के महत्वपूर्ण पद पर भी खुद काबिज रहने की प्रवृत्ति के कारण सरकार और पार्टी दोनों का कामकाज कमजोर होने के उदाहरणों को देखते हुए, रास्वपा यह नया अभ्यास शुरू करने जा रही है।

प्रस्ताव के दो मुख्य फायदे:

सरकार पर शत-प्रतिशत ध्यान (Focus on Delivery): मंत्री बनने के बाद राज्य संचालन और जनसेवा में पूरा समय देना होता है। पार्टी के काम का बोझ न होने से मंत्रियों के कार्यसम्पादन (परफॉर्मेंस) के उत्कृष्ट होने की उम्मीद है।

पार्टी संचालन में चुस्ती (Smooth Party Operation): इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शीर्ष नेताओं के सरकार में जाने पर पार्टी का संगठनात्मक काम न रुके और नई पीढ़ी या संसद से बाहर के नेताओं को भी पार्टी चलाने की जिम्मेदारी मिले। इससे पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और अवसरों का वितरण संतुलित होगा।

रवि और बालेन दोनों सकारात्मक

उच्च राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बालेन गुट द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को लेकर पार्टी सभापति रवि लामिछाने भी काफी सकारात्मक दिख रहे हैं। शुरुआती चरण में मंत्री चुनने का अधिकार किसके पास रहेगा, इस विषय पर कुछ मतभेद थे, लेकिन 'एक व्यक्ति, एक पद' की नीति ने दोनों नेताओं को 'विन-विन' (Win-Win) की स्थिति में ला दिया है।

यदि यह नीति लागू होती है, तो सभापति लामिछाने पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए पूरा समय दे पाएंगे, जबकि बालेन प्रधानमंत्री के रूप में अपने मंत्रिमंडल से स्वतंत्र और प्रभावी रूप से काम ले सकेंगे।

वर्तमान में, दोनों नेताओं के बीच इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए गहन बातचीत चल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह सहमति मूर्त रूप लेती है, तो नेपाली राजनीति में रास्वपा सुशासन और संगठनात्मक प्रबंधन का एक नया और अनुकरणीय अभ्यास शुरू करेगी।