रूपन्देही निर्वाचन क्षेत्र नंबर 2 की चुनावी प्रतिस्पर्धा में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के उम्मीदवार सुलभ खरेल को डॉ. निकोलस भुसाल द्वारा समर्थन दिए जाने के बाद स्थानीय मतदाताओं में तीव्र असंतोष देखा गया है। विवादित छवि वाले उम्मीदवार को समर्थन देने पर कुछ मतदाताओं ने टिप्पणी की है कि डॉ. भुसाल ने अपने प्रभाव और शब्दों का दुरुपयोग किया है। इस निर्णय के कारण स्थानीय स्तर पर उनकी आलोचना बढ़ी है और कुछ लोगों का कहना है कि इससे उनका राजनीतिक भविष्य भी संकट में पड़ सकता है।

डॉ. भुसाल के इस कदम के प्रतिक्रिया स्वरूप मतदाताओं के एक हिस्से ने अपने समर्थन में बदलाव के संकेत दिए हैं। स्थानीय लोगों ने अब “चुन्नु” को वोट देने और उन्हें जिताने के लिए सक्रिय होने की बात सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार चुन्न पौडेल एक स्थानीय व्यवसायी हैं, जिन्हें स्थानीय लोग ‘चुन्नु’ नाम से संबोधित करते हैं। मतदाताओं के अनुसार अब विकल्प के रूप में पेड़ चुनाव चिन्ह पर मतदान कर पौडेल को विजयी बनाने की तैयारी की जा रही है।

इस बार नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के उम्मीदवार तथा पूर्व वित्त मंत्री विष्णु पौडेल के लिए चुनावी माहौल पहले की तुलना में असहज दिखाई दे रहा है। उन पर ललिता निवास भूमि प्रकरण में प्रत्यक्ष संलिप्तता, लुम्बिनी प्रदेश की राजधानी को बुटवल से दांग स्थानांतरित किए जाने के निर्णय के समय मौन रहने, तथा गिरीबन्धु टी-स्टेट भूमि अदला-बदली प्रकरण में नीतिगत भ्रष्टाचार का समर्थन करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इन पुराने विवादों के कारण उनकी लोकप्रियता में कमी आने और चुनावी मुकाबला कठिन होने का विश्लेषण किया गया है।

इधर राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के उम्मीदवार सुलभ खरेल स्वयं भी लगातार विवादों के केंद्र में रहे हैं। उन पर सुप्रीम सहकारी के हजारों पीड़ितों से जुड़े 78 करोड़ से अधिक रुपये के कथित गबन मामले में असंवेदनशील टिप्पणी करने तथा टिकट वितरण के दौरान रातों-रात “टिकट हाईजैक” करने का आरोप है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय और न्यायाधीशों के विरुद्ध सोशल मीडिया पर अपमानजनक शब्दों के प्रयोग तथा संवैधानिक पीठ में बहस के दौरान दबाव सहन न कर बेहोश होने की घटना ने उनकी पेशेवर परिपक्वता पर प्रश्न खड़े किए हैं। हाल ही में अपने घोषणा-पत्र में सामाजिक समूह एमआरआर बुटवल के नाम का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग करने का आरोप भी एक नया विवाद बना है।

प्रमुख उम्मीदवारों से जुड़े इन गंभीर आरोपों और हाल के राजनीतिक ध्रुवीकरण ने रूपन्देही–2 के चुनावी परिणाम को काफी रोचक और अनिश्चित बना दिया है।

 
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