काठमांडू — प्राकृतिक आपदा के समय एकत्र की गई राहत राशि की वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी 'एकद्वार प्रणाली' के पालन को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से दर्ज इस शिकायत में विशेष रूप से अभियन्ता बेदिका केसी द्वारा चलाए गए राहत अभियान में व्यक्तिगत या पारिवारिक बैंक खातों के उपयोग और राहत सामग्री के आधिकारिक स्रोत की जांच की मांग की गई है। पुलिस में दी गई यह याचिका केवल जांच और तथ्यों की पड़ताल की मांग है, यह किसी को दोषी साबित नहीं करती। आपदा प्रबंधन के दौरान वित्तीय जवाबदेही, कानूनी प्रक्रिया और सरकारी नीति के पालन पर आधिकारिक निकायों का ध्यान आकर्षित करने को शिकायतकर्ता ने एक सचेत नागरिक का कर्तव्य बताया है।

उधर, अभियन्ता बेदिका केसी ने खुद पर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए केसी ने दावा किया कि पुलिस शिकायत और हेलीकॉप्टर चार्टर से जुड़ी खबरें प्रसारित करके उनका चरित्र हनन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी व्यक्तिगत क्यूआर कोड या पारिवारिक बैंक खाते के माध्यम से अनधिकृत धन एकत्र नहीं किया है और बताया कि उनके द्वारा बांटी जा रही राहत सामग्री का मुख्य स्रोत 'मामाघर अनाथालय आश्रम' है। बिना सबूत चरित्र हनन का आरोप लगाते हुए उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।

राहत सामग्री के स्रोत के बारे में जानकारी लेने के लिए मामाघर अनाथालय आश्रम से संपर्क करने पर वहां के टेलीफोन ऑपरेटर ने राहत वितरण अभियान में अभियन्ता केसी की संलिप्तता की पुष्टि की। हालांकि, राहत सामग्री के परिवहन के लिए निजी हेलीकॉप्टर चार्टर करने की किसी योजना या समन्वय के बारे में आश्रम के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट खुलासा नहीं किया। ध्यान रहे कि मामाघर अनाथालय आश्रम खुद भी आम जनता और दाताओं के दान व सहयोग पर संचालित संस्था है।

वित्तीय अपारदर्शिता के सवाल के अलावा आपदा प्रबंधन के नजरिए से हितधारकों ने अन्य नीतिगत मुद्दों पर भी चिंता जताई है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा निकायों के साथ आधिकारिक समन्वय के बिना सड़कों की खराब स्थिति, भूस्खलन और हेलीकॉप्टर उड़ान की असमर्थता के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करने से प्रभावित क्षेत्रों के रिश्तेदारों और आम जनता में अनावश्यक डर और घबराहट पैदा होने का जोखिम रहता है। इसी तरह, जिला आपदा प्रबंधन समिति को सूचित किए बिना व्यक्तिगत रूप से राहत सामग्री ले जाने से सरकारी बचाव और वितरण तंत्र की 'एकद्वार नीति' प्रभावित होती है, जिससे वास्तविक पीड़ितों तक राहत पहुंचाना जटिल हो सकता है।

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