काठमांडू — बाढ़ से प्रभावित छात्रों की पढ़ाई की निरंतरता और क्षतिग्रस्त स्कूलों के पुनर्निर्माण के नाम पर विवादित कंसल्टेंसी व्यवसायी तथा ग्रेस इंटरनेशनल के सह-संस्थापक लक्ष्मण पौडेल (एंड्रयू पौडेल) ने 'शिक्षा तथा खेल मंत्रालय' पहुंचकर शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल को 25 लाख रुपये का चेक सौंपा है।

सामाजिक या परोपकारी कार्यों में 'एक हाथ से दिए गए दान का पता दूसरे हाथ को भी न चले' यह एक सार्वभौमिक नैतिक मान्यता रही है।

लेकिन इस विवादित व्यवसायी के लिए शिक्षा मंत्री का कक्ष ही अपनी ब्रांडिंग और व्यावसायिक प्रचार करने का सबसे बेहतरीन स्थान बना हुआ दिखा।

मंत्रालय में ही पहुंचकर कैमरों के सामने मंत्री के साथ मुस्कुराते हुए 25 लाख का चेक सौंपे जाने के इस दृश्य ने अब शैक्षिक और राजनीतिक गलियारों में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कंसल्टेंसी व्यवसाय प्रत्यक्ष रूप से शिक्षा तथा खेल मंत्रालय के नियमन और क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाला एक संवेदनशील क्षेत्र है।

खुद का नियमन करने वाले मंत्रालय के मंत्री से ही मिलकर 25 लाख का चेक थमाना और फोटो खिंचवाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि व्यापारी मंत्री को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।

दूसरी ओर, आपदा के समय एकत्र की जाने वाली राहत और सहायता के लिए सरकार हमेशा 'एकल-द्वार प्रणाली' लागू करती आई है।

आपदा के समय एकत्र की गई राहत राशि अनिवार्य रूप से 'प्रधानमंत्री दैवीय आपदा राहत कोष' में जमा की जानी चाहिए, ऐसा स्पष्ट सरकारी नियम है।

क्या इस व्यापारी को सरकार की इस नीति के बारे में जानकारी नहीं थी या जानबूझकर मंत्री को आगे करके अपने व्यावसायिक हितों को पूरा करने का प्रयास किया गया? सवाल गंभीर है।

यदि व्यापारी अनजान भी था, तो भी सरकार के नियमों और नीतियों का पालन कराने वाली शिक्षा मंत्री को तो अपनी ही सरकार की व्यवस्था की अच्छी जानकारी होनी चाहिए थी।

हैरानी की बात तो यह है कि सरकार की अपनी नीति की परवाह किए बिना शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल स्वयं नियामक निकाय की गरिमा को भूलकर इस प्रचार-प्रसार की गवाह बनी हैं।

शिक्षा मंत्री जी, यदि विवादित व्यापारी का 25 लाख का चेक पकड़कर कैमरों के सामने मुस्कुराना ही मंत्रालय का मुख्य कार्य है, तो अब आपके खाली समय का पूरा उपयोग होना चाहिए। मंत्री जी, आप स्वयं बैंक की लाइन में खड़े हों, अपने हाथों से बैंक वाउचर भरें और प्रधानमंत्री के आधिकारिक फेसबुक पेज से उस वाउचर को सार्वजनिक करते हुए ग्रेस इंटरनेशनल का मुफ्त विज्ञापन कर दें! नियामक मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्री ही विवादित व्यापारी का चेक ढोने वाले 'कुली' बनकर बैंक खाते में पैसा जमा कराने के लिए तत्पर हो जाएंगे, तो देश के शिक्षा क्षेत्र का विकास तो निश्चित ही आसमान छुएगा!

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