नेपाल के अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग (CIAA) ने पिछले पांच वर्षों के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक व्यापक कानूनी मोर्चा खोल दिया है। आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल 798 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 4,662 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इन मामलों में सार्वजनिक धन की हेराफेरी के खिलाफ 31.52 अरब रुपये से अधिक की वसूली (बिगो) का दावा किया गया है।

आयोग की इस सक्रियता का असर सत्ता के गलियारों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आरोपियों की सूची में पूर्व प्रधानमंत्रियों से लेकर स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि और सरकार के शीर्ष सचिव शामिल हैं। प्रवक्ता सुरेश न्यौपाने के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में शिकायतों की संख्या में भारी उछाल आया है, जो वर्तमान वित्त वर्ष में 37,000 के आंकड़े को पार कर गई है। हालांकि विशेष अदालत में सजा की दर लगभग 55 प्रतिशत रही है, लेकिन आयोग ने हार न मानते हुए 719 मामलों को पुनरीक्षण के लिए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

गंभीर आरोपों का सामना करने वालों में कई पूर्व कैबिनेट मंत्री शामिल हैं, जिन पर विमान खरीद, टेरामक्स सिस्टम और हवाई अड्डा निर्माण जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में अनियमितता के आरोप हैं। पूर्व मुख्य सचिव और विभिन्न मंत्रालयों के सचिव भी इस कानूनी जांच की चपेट में आए हैं। 2021 में 'स्टिंग ऑपरेशन' पर कानूनी रोक लगने के बावजूद, आयोग ने साक्ष्य-आधारित जांच के माध्यम से अपना संवैधानिक दायित्व जारी रखा है।

भ्रष्टाचार के साथ-साथ अब आयोग मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की भी जांच कर रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस निरंतर कानूनी संघर्ष का उद्देश्य सार्वजनिक संस्थानों में शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। आयोग के बढ़ते कदमों से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में सरकारी पदों का दुरुपयोग करने वालों के लिए कानूनी रास्ते और कठिन होने वाले हैं।