नेपाल के उत्तरी क्षेत्रों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के उफान से भारी तबाही मची है। इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या 165 से अधिक हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।

बुधवार सुबह आए मलबे और पानी के तेज बहाव में कई गांव और वाहन बह गए। राहत और बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं, जिनमें लगभग 500 विदेशी नागरिकों सहित 826 लोग शामिल हैं।

इस त्रासदी के बाद सीमापार पूर्व सूचना प्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल को बाढ़ की पहली जानकारी आधिकारिक माध्यमों की बजाय स्थानीय निवासियों के जरिए मिली।

तिब्बत क्षेत्र में बाढ़ सुबह करीब 8.15 बजे (नेपाली समय) देखी गई थी, लेकिन डाउनस्ट्रीम इलाकों को समय पर औपचारिक चेतावनी न मिलने का आरोप लगाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी सीमा पार निर्माण कार्यों को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं।

काठमांडू स्थित चीनी दूतावास ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। दूतावास की ओर से कहा गया कि किसी बांध के टूटने या चेतावनी न देने की बात निराधार है। उनके अनुसार, नेपाल की ओर आए भूकंप या ग्लेशियर ढहने से दोनों तरफ नुकसान हुआ है।

चीनी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आपदा के तुरंत बाद आपातकालीन तंत्र सक्रिय कर दिया गया था और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रभावित इलाकों में सड़क मार्ग बहाल करने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है।