नेपालके वन एवं वातावरण मंत्रालय के सचिव डॉ. गोविंद प्रसाद शर्मा ने दावा किया है कि इस चालू वित्त वर्ष में वनाग्नि यानी जंगल की आग की घटनाओं में कमी आने की प्रबल संभावना है। सोमवार को काठमांडू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई शीतकालीन वर्षा ने जंगलों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम किया है। सचिव शर्मा के अनुसार, बारिश के कारण जंगलों में जमा सूखे पत्ते और टहनियां सड़ने लगी हैं, जिससे आग लगने के लिए जिम्मेदार 'ईंधन' प्राकृतिक रूप से कम हो गया है।

सचिव शर्मा ने मौसम के मिजाज का विश्लेषण करते हुए बताया कि जनवरी के अंत और फरवरी की शुरुआत में होने वाली वर्षा मिट्टी में नमी को सोख लेती है। यह नमी न केवल पत्तों को गलने में मदद करती है, बल्कि तापमान में होने वाली अचानक वृद्धि के प्रभाव को भी कम करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष के जलवायु परिवर्तनों ने वनाग्नि के जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे वन संपदा के संरक्षण में मदद मिलेगी।

हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि जोखिम कम होने के बावजूद आकस्मिक आगजनी की घटनाओं के प्रति सतर्क रहना अनिवार्य है। सचिव शर्मा ने जोर देकर कहा कि कुछ 'फायर जोन' अब भी खतरनाक हो सकते हैं, जहाँ छोटी सी लापरवाही भी भारी नुकसान पहुँचा सकती है। उन्होंने इस क्षेत्र में और अधिक शोध और जन-जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भविष्य में वनाग्नि के प्रबंधन को और अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाया जा सके।