विभिन्न हिंदू समूहों के विरोध प्रदर्शनों के बाद नेपाल सरकार ने आगामी तीन महीनों के भीतर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के विषय पर सर्वपक्षीय चर्चा शुरू करने का निर्णय लिया है।

धनुषा के प्रमुख जिलाधिकारी प्रेमप्रसाद लुइतेल ने समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य भविष्य में आवश्यक संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना है।

समझौते के तहत कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए धार्मिक जुलूसों में हथि‍यारों के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध मोहर्रम और अन्य सभी धार्मिक आयोजनों पर लागू होगा।

ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से मस्जिद, मदरसा, चर्च और गुंबद जैसे उपासना स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज को उनके परिसर तक सीमित रखने का नियम तय किया गया है।

इसके अलावा, धार्मिक स्थलों में रहने वाले लोगों का पहचान रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा और वहां आने वाले विदेशी नागरिकों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।

सरकार मुस्लिम आयोग की प्रासंगिकता का पुनर्मूल्यांकन करने पर भी सहमत हुई है, जिसके बाद जरूरत न होने पर इसे समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मदरसों और धार्मिक संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी फंड की गहन जांच की जाएगी। साथ ही वर्ष 2006-07 के बाद जारी की गई नागरिकता की वैधता की समीक्षा करने और सोशल मीडिया पर सौहार्द बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।