नेपाल सरकार ने सिविल सेवा के भीतर राजनीतिक तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त रुख अपनाया है। संघीय मामले तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक आधिकारिक सूचना में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को राजनीतिक दलों या उनके भ्रातृ संगठनों की सदस्यता लेने की अनुमति नहीं है।
मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि जो कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाएंगे, उन्हें भविष्य में सरकारी सेवा के लिए अयोग्य घोषित करते हुए पद से हटा दिया जाएगा। यह कार्रवाई सिविल सेवा अधिनियम, 1992 की धारा 61(1)(ई) के प्रावधानों के तहत की जाएगी, जो राजनीति में भाग लेने वाले कर्मचारियों की बर्खास्तगी का अधिकार देती है। सरकार का तर्क है कि प्रशासन को निष्पक्ष, पेशेवर और जवाबदेह बनाने के लिए कर्मचारियों का राजनीति से दूर रहना अनिवार्य है।
शाखा अधिकारी विवेक विडारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी किसी राजनीतिक पद के लिए चुनाव लड़ता है या किसी दल के लिए सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसके विरुद्ध कानूनन कठोर कदम उठाए जाएंगे। इस निर्देश का मूल उद्देश्य सरकारी मशीनरी की साख को बचाना और यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक सेवा बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के संचालित हो। यह आदेश सरकारी कर्मचारियों के लिए अनुशासन के एक नए मानक के रूप में देखा जा रहा है।
