प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठतम सदस्य अर्जुन नरसिंह केसी ने संसद को देश की राजनीतिक संस्कृति और पहचान का केंद्र बताया है। न्यूज एजेंसी नेपाल से बात करते हुए केसी ने कहा कि लोकतंत्र और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए संसद और सभामुख को संरक्षक के रूप में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने उल्लेख किया कि संसद विभिन्न विचारधाराओं का मिलन स्थल है, इसलिए वहां मतभेद और विवाद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। केसी के अनुसार, गहन चर्चा और बहस के बाद जो निष्कर्ष निकलता है, वही लोकतंत्र की असली खूबसूरती है। उन्होंने संसद को संवाद और वाद-प्रतिवाद का सर्वोच्च मंच करार दिया।

सभामुख के चुनाव से पहले सदन की कमान संभाल रहे केसी ने अपनी भूमिका को पूरी तरह तटस्थ और प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। सर्वदलीय बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल सदन की कार्यवाही को बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलाने के लिए एकमत हैं, जिससे भविष्य की बैठकों में विवाद की संभावना कम है।

शासन व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को केवल संख्या बल के बजाय संविधान की रक्षा और जनता की सर्वोच्चता को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में सहयोग करना और गलतियों पर रचनात्मक आलोचना करना ही लोकतंत्र का मूल मंत्र है।

भ्रष्टाचार को समाज के असंतोष का मुख्य कारण बताते हुए केसी ने नीतिगत भ्रष्टाचार को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और विधि के अनुसार होनी चाहिए। पूर्वाग्रह के आधार पर की गई कार्रवाई से अराजकता फैलने का खतरा रहता है।

वरिष्ठ सदस्य के रूप में केसी आज प्रतिनिधि सभा की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि जब तक नए सभामुख का चयन नहीं हो जाता, वे संसदीय गरिमा और मर्यादा को बनाए रखते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।