नेपाल की नई संसद के शपथ ग्रहण समारोह में आज मर्यादाक्रम और बैठने की व्यवस्था ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पारंपरिक राजनीति के दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए, इस बार सदन की अगली कतार में नई पीढ़ी और वैकल्पिक राजनीति के प्रतिनिधि छाए रहे। यह दृश्य न केवल दुर्लभ था, बल्कि देश की बदलती राजनीतिक दिशा का एक शक्तिशाली प्रतीक भी बन गया।

समारोह के मुख्य आकर्षण वाली अग्रिम पंक्ति में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की सोभिता गौतम, अध्यक्ष रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) को विशिष्ट स्थान मिला। उनके साथ अर्थशास्त्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले, राप्रपा के ज्ञानेन्द्र शाही और धरान के मेयर हर्क साम्पाङ भी अग्रिम कतार में दिखाई दिए। सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब रहा जब पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल 'प्रचंड' और एमाले के दिग्गज नेता रामबहादुर थापा 'बादल' जैसे 'हैवीवेट' नेता इन युवा चेहरों के पीछे वाली दीर्घा में नजर आए।

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इस व्यवस्था में पार्टी के भीतर की आंतरिक रैंकिंग भी चर्चा का विषय रही। आरएसपी के प्रभावशाली वक्ता मनीष झा, डॉ. तोशिमा कार्की और रमेश प्रसाईं जैसे नेताओं को पहली पंक्ति में जगह नहीं मिली और वे दूसरी दीर्घा में बैठने को मजबूर हुए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा कार्यकर्ता सुदन गुरुङ और आशिका तामाङ को सदन की आखिरी पंक्तियों में स्थान मिला।

संसद का यह प्रारंभिक नजारा स्पष्ट करता है कि अब सत्ता के गलियारों में पुराने दिग्गजों की तुलना में जमीन और स्थानीय स्तर से उभरे नेताओं का दखल बढ़ने वाला है। अगली कतारों में नए चेहरों की यह मौजूदगी आगामी संसदीय सत्रों में तीखी बहस और शक्ति संतुलन के नए समीकरणों की ओर इशारा करती है।